सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : आंखों की रोशनी नहीं, फिर भी बुंदेली आवाज से सुनील लोधी ने जीती दुनिया, जानें ‘मोरे संकट के कटैया हनुमान’सागर: मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड की मिट्टी से निकली एक ऐसी आवाज आज देशभर में सुर्खियां बटोर रही है, जिसने साबित कर दिया कि प्रतिभा किसी शारीरिक कमी की मोहताज नहीं होती। सागर जिले के छोटे से गांव अगरा के रहने वाले सुनील लोधी दृष्टिबाधित हैं, लेकिन उनकी बुंदेली लोकगायकी और भक्ति गीतों ने उन्हें सोशल मीडिया से लेकर बॉलीवुड तक पहुंचा दिया है।
सुनील को सबसे पहले ‘मोरे संकट के कटैया हनुमान’ भजन से व्यापक पहचान मिली। बुंदेली अंदाज में गाए गए इस भजन की रील सोशल मीडिया पर वायरल हुई और देखते ही देखते उनके लाखों प्रशंसक बन गए। हालिया रिपोर्टों के मुताबिक, इस गीत के वीडियो को YouTube पर 3 करोड़ से ज्यादा व्यूज मिल चुके हैं।तमूरा लेकर शुरू हुआ था सफरसुनील का संगीत से रिश्ता बचपन से रहा है। उन्होंने गांव में बुजुर्गों की संगत में बैठकर तमूरा बजाना सीखा और बाद में एकतारा लेकर लोकगीत व भजन गाने लगे। उनकी गायकी में बुंदेली लोकभाषा की सहजता और भक्ति का गहरा भाव दिखाई देता है।
उनके परिवार की आर्थिक स्थिति भी बहुत मजबूत नहीं रही। रिपोर्टों के अनुसार परिवार की आजीविका खेती और पशुपालन पर निर्भर रही है। इसके बावजूद सुनील ने संगीत का साथ नहीं छोड़ा और गांव की चौपालों तथा स्थानीय आयोजनों में अपनी आवाज का जादू बिखेरते रहे।सोशल मीडिया ने बदल दी जिंदगीसुनील की प्रतिभा को सोशल मीडिया के जरिए नई पहचान मिली। उनकी एक रील वायरल होने के बाद ‘मोरे संकट के कटैया हनुमान’ भजन ने उन्हें बड़ी संख्या में लोगों तक पहुंचा दिया। इस सफलता के बाद मुंबई से उन्हें फिल्म में गाने का मौका मिला।
उनकी कहानी का अगला बड़ा पड़ाव फिल्म ‘हनुमान अंश’ बनी। नीम करोली बाबा के जीवन पर आधारित इस फिल्म में सुनील ने ‘मैंने तेरे ही भरोसे हनुमान, सागर में नैया डार दई’ भजन गाया है। रिपोर्ट के मुताबिक फिल्म के निर्देशक विशाल चतुर्वेदी ने उनके कई लोकगीत सुनने के बाद इस गीत के लिए उनका चयन किया और रिकॉर्डिंग भी बेहद कम समय में पूरी हुई।
एक भजन से फिल्म तक पहुंची आवाजसुनील के लिए ‘मोरे संकट के कटैया हनुमान’ सिर्फ एक वायरल गीत नहीं, बल्कि उनके जीवन में बदलाव लाने वाला पड़ाव साबित हुआ। इसी भजन ने उन्हें सोशल मीडिया पर पहचान दिलाई और फिर उसी पहचान ने फिल्म इंडस्ट्री का रास्ता खोल दिया। अब उनकी आवाज ‘हनुमान अंश’ के जरिए देशभर के दर्शकों तक पहुंच रही है।
रिपोर्टों के अनुसार सुनील को फिल्म के लिए एक गीत के अलावा कई अन्य गानों का कॉन्ट्रैक्ट भी मिला है। यानी बुंदेलखंड की लोकधुनों से शुरू हुआ उनका सफर अब बड़े मंच की ओर बढ़ रहा है।सुनील लोधी की कहानी सिर्फ एक गायक के प्रसिद्ध होने की कहानी नहीं है। यह उस संघर्ष की कहानी है जिसमें सीमित संसाधनों और दृष्टिबाधिता के बावजूद एक कलाकार ने अपनी आवाज को अपनी सबसे बड़ी ताकत बनाया। बुंदेली भाषा और लोकसंगीत को देश के बड़े मंच तक पहुंचाने वाले सुनील आज हजारों लोगों के लिए प्रेरणा बन चुके हैं।
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