सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : नई दिल्ली। भारत में पुन: उपयोग योग्य अंतरिक्ष प्रक्षेपण प्रणालियों के विकास को बढ़ावा देने के लिए प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड ने चेन्नई स्थित अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी कंपनी अग्निकुल कॉसमॉस के साथ 200 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता का समझौता किया है। यह सहायता अनुसंधान, विकास और नवाचार कोष के तहत दी जाएगी। इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य पुन: उपयोग योग्य अग्निबाण प्रक्षेपण यान का विकास करना है। इसके तहत प्रौद्योगिकी को वर्तमान स्तर से आगे बढ़ाकर उच्च तकनीकी तैयारी स्तर तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है। वित्तीय सहायता वैकल्पिक रूप से परिवर्तनीय ऋण-पत्रों के माध्यम से उपलब्ध कराई जाएगी।

अग्निबाण की प्रस्तावित संरचना को इस तरह विकसित किया जा रहा है कि प्रक्षेपण यान को बार-बार उपयोग किया जा सके। इससे प्रक्षेपण की आवृत्ति बढ़ाने के साथ निर्माण और प्रक्षेपण लागत कम करने तथा अंतरिक्ष मलबे को सीमित करने में मदद मिलने की उम्मीद है। परियोजना में प्रणोदन, उड़ान, कक्षा में स्थापित करने, नीचे लाने और सुरक्षित वापसी से जुड़ी तकनीकों के विकास पर भी काम किया जाएगा। अग्निकुल कॉसमॉस पहले ही अग्निबाण प्रक्षेपण यान और एकल-खंड त्रि-आयामी मुद्रित अग्निलेट रॉकेट इंजन जैसी तकनीकों पर काम कर चुकी है। प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड इससे पहले भी कंपनी को छोटे उपग्रहों के लिए अनुकूलित प्रक्षेपण यान के विकास और व्यावसायीकरण में सहायता दे चुका है।

प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड के सचिव राजेश कुमार पाठक के अनुसार, भारत के अगले चरण के अंतरिक्ष कार्यक्रम में ऐसी तकनीकों की आवश्यकता होगी, जो अधिक आवृत्ति, लचीलेपन और दक्षता के साथ अंतरिक्ष तक पहुंच उपलब्ध करा सकें। अग्निबाण कार्यक्रम का उद्देश्य देश में उन्नत और पुन: उपयोग योग्य अंतरिक्ष परिवहन प्रणालियों की क्षमता को मजबूत करना है।


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