सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय भोपाल परिसर के शोधकेन्द्र द्वारा संचालित प्री पीएचडी कोर्सवर्क में देश भर के शोधार्थियों को संबोधित करते हुए बताया कि एक आदर्श शोध कर्ता को शोध कार्य में व्यवस्थित सन्दर्भों को पुष्ट प्रमाणों के साथ शोध निष्कर्ष को आकर देना होता है।आज तकनीकी के युग में सभी शोध सामग्री प्रायः अंतर्जाल पर उपलब्ध है, बस हमें उसके पुष्ट संदर्भ में साथ शोध की प्रामाणिकता को प्रस्तुत करना होगा। गोविन्द पाण्डेय ने स्वागत भाषण दिया और पाठयक्रम समन्वयक ने बताया कि मनीष शर्मा सामाजिक विज्ञान के अंतर्गत अर्थशास्त्र के अनुशासन में शोध संदर्भों को लेकर गंभीर अध्येता के रूप में जाने जाते हैं।सुबोध शर्मा ने कहा कि केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय मल्टीडिसिप्लिनरी शोध को बढ़ावा दे रहा है। नई शिक्षा नीति 2020 में संस्कृत के शोध कर्ता को अंतः अनुशासनात्मक शोध की दिशा में आगे बढ़ने का मार्ग प्रशस्त किया है।हमारे शोध कर्ताओं को इस पर खूब परिश्रम कर अंतः अनुशासनात्मक शोध कार्य करना चाहिए जिससे शोध कर्ताओं का भविष्य उज्ज्वल हो सके।द्वितीय वक्ता के रूप में विजय शंकर शुक्ल,वाराणसी ने मातृका विज्ञान पर केन्द्रित व्याख्यान दिया।आपने बताया कि ऋषियों के द्वारा श्रुति परम्परा से प्राप्त साहित्य जो हस्तलिखित रूप में प्राप्त होता है वह मातृका विज्ञान में समाहित है। उनके सम्पादन और संशोधन की प्रक्रिया पाण्डुलिपि सम्पादन विज्ञान अथवा हस्तलेख विज्ञान माना गया।शोध केन्द्र समन्वयक कृपा शंकर शर्मा ने धन्यवाद ज्ञापन किया ।
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