सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्कआईटीडीसी इंडिया ईप्रेस / आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : जी के मानद चेयरमैन सुभाष चंद्रा गोयनका ने कहा है कि वे सोनी के खिलाफ क्रिमिनल केस करने पर विचार कर रहे हैं। यह बात सुभाष चंद्रा ने इकोनॉमिक टाइम्स को दिए एक इंटरव्यू में कही है। इतना ही नहीं सुभाष चंद्रा ने अपनी कंपनी द्वारा पुनित गोयनका को CEO पद से हटाने की पेशकश के बावजूद 10 बिलियन डॉलर की डील कैंसल करने के पीछे सोनी की मंशा पर सवाल भी उठाया है।

जी ने सोनी के साथ डील में निर्धारित सभी शर्तों को पूरा किया था

सुभाष चंद्रा ने इंटरव्यू में सोनी पर जानबूझकर डील में बाधा डालने और कंपनी के खिलाफ क्रिमिनल एक्शन यानी आपराधिक कार्रवाई की धमकी देने का आरोप लगाया है। चंद्रा ने दावा किया कि जी ने सोनी के साथ डील में निर्धारित सभी शर्तों को पूरा किया था। यह सोनी की जी के साथ जुड़ने और बाद में पीछे हटने की रणनीति थी। सोनी ऐसा करके जी को कमजोर कंपनी के रूप में चित्रित करना चाहता है।

जी में अपनी हिस्सेदारी मौजूदा 4% से बढ़ाकर 26% करना चाहते हैं सुभाष चंद्रा

वहीं जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज (ZEEL) के फाउंडर सुभाष चंद्रा की फैमिली यानी प्रमोटर्स कंपनी में अपनी हिस्सेदारी मौजूदा 4% से बढ़ाकर 26% करने वाले हैं। सुभाष चंद्रा ने मिंट को दिए इंटरव्यू में कहा, ‘मैंने अपनी फैमिली को जी में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने की सलाह दी है। हम आखिरकार 26% हिस्सेदारी वापस पाना चाहते हैं, लेकिन इसमें समय लगेगा।’

सुभाष चंद्रा ने कहा कि यह बात सच है कि उन्हें बहुत अधिक पैसे की जरूरत होगी। लेकिन वे इस बात को लेकर स्पष्ट हैं कि पैसा बाहर से नहीं जुटाया जाएगा। उन्होंने कहा कि हम और कर्ज नहीं चाहते। चंद्रा ने साल 1992 में जी को शुरू किया था। वह अब जी के मानद चेयरमैन हैं।

सेबी ने जून में कहा था- चंद्रा ने अपने फायदे के लिए फंड का गबन किया

जी-सोनी डील में विवाद तब शुरू हुआ, जब सेबी ने जून 2023 में कहा था कि पुनित गोयनका और उनके पिता सुभाष चंद्रा ने अपने पद का दुरुपयोग किया और अपने फायदे के लिए फंड का गबन किया। जब इसकी जांच चल रही थी, तब मार्केट रेगुलेटर सेबी ने उन्हें लिस्टेड कंपनियों में किसी भी एग्जीक्यूटिव या डायरेक्टर पद पर रहने से रोक दिया था।

अक्टूबर में एक अपीलेट अथॉरिटी ने गोयनका को सेबी के बैन से पार्शियल राहत दी थी। जिससे उन्हें जांच के दौरान इन पदों पर बने रहने की अनुमति मिल गई थी। जी ने अपीलेट की इस राहत को मर्ज की जाने वाली एंटिटी के CEO बनने के लिए गोयनका के लिए हरी झंडी के रूप में देखा, लेकिन सोनी इससे सहमत नहीं था।

गोयनका को अंतरिम CEO बनाने की पेशकश की गई थी। वहीं नए CEO की तलाश के लिए एक सर्च कमेटी गठित की गई थी। हालांकि, सोनी ने मर्ज की जाने वाली एंटिटी के CEO पद के लिए अपने इंडिया ऑपरेशंस के हेड एन.पी. सिंह के नाम पर जोर दिया था।

सुभाष चंद्रा ने पैसों की हेराफेरी के आरोप की निंदा की

इंटरव्यू में सुभाष चंद्रा ने पैसों की हेराफेरी के आरोप की निंदा की। उन्होंने कहा कि अगर पैसा ट्रांसफर किया गया होता…तो वो ट्रेल हो जाता। इसके अलावा चंद्रा ने यह भी बताया कि उन्होंने बैंकों को करीब 40,000 करोड़ रुपए चुका दिए हैं। चंद्रा ने बताया कि उन्हें बाउंस-बैक का भरोसा था। 1998-99 में एक एनालिस्ट ने भविष्यवाणी की थी कि जी इस कॉम्पिटेटिव एनवायरमेंट में टिक नहीं पाएगा… हम न केवल बचे रहे, बल्कि फले-फूले भी।

फंड मैनेज करने वाली अटलांटा बेस्ड कंपनी इनवेस्को लिमिटेड एक समय 18% की हिस्सेदारी के साथ जी की सबसे बड़ी शेयरहोल्डर थी। इस कंपनी ने भी 2021 में गोयनका को जी के बोर्ड और CEO पद से हटाने के लिए लड़ाई छेड़ी थी। तब इस कंपनी ने कहा था कि जी के फाउंडर्स शेयरहोल्डर्स के पैसों पर खुद को समृद्ध कर रहे थे। तब सोनी और जी की मर्जर डील ने इनवेस्को को शांत करने में मदद की थी।