सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क – आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस  /  आईटीडीसी न्यूज़  भोपाल  /   उज्जैन   सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय में विश्व सांकेतिक भाषा दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम ने उपस्थित छात्रों और अतिथियों को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य मूक-बधिर और दिव्यांग बच्चों के अधिकारों और उनके सामाजिक समावेशन पर प्रकाश डालना था। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में इंदौर के प्रसिद्ध मूक-बधिर ट्रेनर श्री ज्ञानेंद्र पुरोहित उपस्थित रहे। उन्होंने सम्पूर्ण आयोजन के दौरान व्याख्यान, भाषण और संवाद के समय सांकेतिक भाषा का लाइव प्रदर्शन किया, जिससे सभी उपस्थित अतिथियों और विद्यार्थियों का मन मोह लिया।

विशेष अतिथि सांकेतिक भाषा मास्टर ट्रेनर प्रियंका साहू और मनोविकास विशेष शिक्षा महाविद्यालय के निदेशक फादर टॉम जॉर्ज भी कार्यक्रम में शामिल हुए। मुख्य अतिथि ज्ञानेंद्र पुरोहित ने अपनी डॉक्यूमेंट्री “खामोशी की गूंज” प्रस्तुत की, जिसमें मूक-बधिर एवं दिव्यांग बच्चों की शिक्षा, प्रशिक्षण और उनके जीवन संघर्ष को दिखाया गया। इसके अलावा विश्वविद्यालय द्वारा बनाई गई योग पर डॉक्यूमेंट्री “अनुगूंज” भी प्रस्तुत की गई, जिससे बच्चों को योग के महत्व के बारे में जानकारी मिली।

कुलगुरु अर्पण भारद्वाज ने अपने अध्यक्षीय संबोधन में कहा कि सांकेतिक भाषा केवल मूक-बधिर व्यक्तियों के लिए ही नहीं, बल्कि समाज के लिए भी अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने छात्रों से आग्रह किया कि वे इसे सामाजिक अभियान के रूप में अपनाएं और दिव्यांग बच्चों को मुख्यधारा में जोड़ने के प्रयास करें। कार्यक्रम में सांकेतिक भाषा कार्यशाला का आयोजन भी किया गया, जिसमें सभी प्रतिभागियों को हाथों के माध्यम से संवाद करने का प्रशिक्षण दिया गया।

मूक-बधिर बच्चों की सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम को और भी खास बनाया। कार्यक्रम के अंत में छात्रों ने विभिन्न राज्यों की लोक-नृत्य प्रस्तुतियां देकर भारत की सांस्कृतिक विविधता का परिचय दिया और राष्ट्रीय गान सांकेतिक भाषा में गाया गया। यह आयोजन विश्वविद्यालय में सांकेतिक भाषा के महत्व को बढ़ावा देने और दिव्यांग बच्चों के अधिकारों की सुरक्षा के लिए एक ऐतिहासिक कदम साबित हुआ।

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