सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल  : छत्रपति शाहू महाराज विश्वविद्यालय में स्कूल ऑफ आइटी ह्यूमैनिटीज एवं सोशल साइंसेज में एक दिवसीय भगवद गीता पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। स्कूल ऑफ आइटी ह्यूमैनिटीज एवं सोशल साइंसेज के सहयोग से हुए इस आयोजन में देश भर से स्कॉलर्स, ऑनलाइन एवं ऑफलाइन रूप से प्रतिभाग किए। मुख्य अतिथि के रूप में आईआईएम भोपाल के प्रोफेसर बी महादेवन शामिल हुए। यह जानकारी कार्यक्रम के संयोजक प्रशांत ने दी।
मुख्य अतिथि प्रोफेसर बी महादेवन ने अपने संबोधन में कहा कि भगवान भी विकास के साथ-साथ पुरानी चीजों को नष्ट करते जाते हैं। भगवान शिव को संदर्भित करते हुए उन्होंने कहा कि कैसे पुराने कर्मों को समाप्त कर नए और अच्छे कार्यों को अपनाना चाहिए, जिससे समाज में सकारात्मक परिवर्तन हो सके। उन्होंने महाभारत में श्री कृष्ण के उपदेशों की वर्तमान समस्याओं में प्रासंगिकता पर भी चर्चा की।
विशिष्ट अतिथि आर्यकुल विश्वविद्यालय के वेदांत पाठक ने बताया कि कठिन समय में भगवद गीता का पाठ मानसिक शांति प्रदान करता है और आत्म-नियंत्रण की सीख देता है। उन्होंने कहा कि गीता केवल पढ़ने के लिए नहीं बल्कि इसे जीवन में उतारने की आवश्यकता है।
कार्यक्रम का संचालन कर रहे विदि के प्रतिकुलपति प्रोफेसर सुधीर कुमार अवस्थी ने बताया कि गीता के दो अर्थ होते हैं—एक मार्ग और एक समस्या। यह जीवन में दो दिशाएं दिखाती है—एक संघर्ष से जुड़ने का और दूसरा उसका समाधान खोजने का। उन्होंने कहा कि हमें जीवन में अच्छे कर्मों को अपनाकर दूसरों के लिए प्रेरणा बनना चाहिए।
कार्यक्रम में आईआईएम लखनऊ से आए अजय शुक्ला ने भगवद गीता को आधुनिक व्यापार मॉडल और प्रबंधन के दृष्टिकोण से जोड़ते हुए कहा कि गीता के उपदेश आज भी प्रासंगिक हैं और व्यावसायिक निर्णयों में सहायक हो सकते हैं।
विवि के कुलसचिव डॉ. अमित कुमार सिंह ने भी अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि गुरुकुल शिक्षा पद्धति और महर्षि पतंजलि के ज्ञान को अपनाकर भारतीय शिक्षा प्रणाली को और अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।
इस अवसर पर सभी अतिथियों ने भगवद गीता के महत्व और इसके आध्यात्मिक संदेश को समाज में प्रसारित करने की आवश्यकता पर बल दिया।

इस संगोष्ठी में सीएनएस राजेश कुमार द्विवेदी, संतोष सिंह, किरण सत्र, बलराम मरेका, अवनीश तिवारी सहित अन्य विद्वानों ने भी भगवद गीता के विविध संदर्भों पर चर्चा की और इसके आधुनिक संदर्भों को उजागर किया।

#सकारात्मकपरिवर्तन #अच्छेकर्म #प्रोबीमहादेवन #समाजसेवा