सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क – आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस / आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल / नई दिल्ली : कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश पर कड़ा एतराज जताया है, जिसमें दिल्ली-एनसीआर से सभी आवारा कुत्तों को आठ हफ्तों के भीतर हटाकर स्थायी रूप से शेल्टर होम में भेजने का निर्देश दिया गया है। राहुल ने इसे दशकों से अपनाई गई मानवीय और वैज्ञानिक पॉलिसी से पीछे ले जाने वाला कदम बताया। उनका कहना है कि बेजुबान पशु कोई “समस्या” नहीं हैं जिन्हें हटाया जाए, बल्कि शेल्टर्स, नसबंदी, टीकाकरण और सामुदायिक देखभाल जैसे मानवीय उपाय अपनाने चाहिए।
राहुल ने X पर लिखा कि पूरी तरह पाबंदी क्रूर और अदूरदर्शी है, जो हमारी दया-भावना को खत्म करती है। जन सुरक्षा और पशु कल्याण दोनों को साथ लेकर चलना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि बिना क्रूरता के भी डॉग्स को सुरक्षित रखा जा सकता है।
सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस आर महादेवन की बेंच ने 11 अगस्त को यह आदेश जारी किया था। कोर्ट ने कहा था कि आवारा कुत्तों को सड़कों पर वापस नहीं छोड़ा जाना चाहिए। इस फैसले पर मेनका गांधी ने भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि दिल्ली में लगभग तीन लाख आवारा कुत्ते हैं, जिन्हें रखने के लिए हजारों शेल्टर होम बनाने होंगे, क्योंकि अधिक संख्या में कुत्तों को एक साथ नहीं रखा जा सकता।
पशुपालन राज्य मंत्री के अनुसार, 2024 में 37 लाख से अधिक डॉग बाइट्स के मामले और 54 रेबीज से मौतें दर्ज हुईं। सुप्रीम कोर्ट ने रेबीज को बेहद चिंताजनक बताते हुए इस पर स्वतः संज्ञान लिया था। यह बहस अब पशु अधिकार और जन सुरक्षा के बीच संतुलन को लेकर और तेज हो गई है।
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