सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस / आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल: भारतीय युवा भारत में खुश नहीं है, वह विदेश में अपना बिजनेस स्टैबलिश करना चाहते हैं। हमें यह पूछने की जरूरत है कि ऐसा क्या है जो युवाओं को भारत में रहने के बजाय बाहर स्थापित होने के लिए मजबूर करता है? यह बात रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया यानी RBI के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने अमेरिका के जॉर्ज वाशिंगटन यूनिवर्सिटी में कही।
उन्होंने इस दौरान किक्रेटर विराट कोहली का जिक्र किया। रघुराम राजन ने कहा, ‘मुझे लगता है कि भारतीय युवा की मानसिकता क्रिकेटर विराट कोहली जैसी है। मैं दुनिया में किसी से पीछे नहीं हूं। युवा उन जगहों पर चले जाते हैं जहां से उन्हें अंतिम मार्केट तक पहुंचना आसान लगता है।
राजन ने चिप मैन्युफैक्चरिंग पर लाखों डॉलर खर्च की आलोचना की
रघुराम राजन ने भारत की ओर से चिप मैन्युफैक्चरिंग पर लाखों खर्च करने की आलोचना की। उन्होंने कहा कि इन चिप मैन्युफैक्चरिंग फैक्ट्रीज को सब्सिडी देने के लिए कई अरब खर्च किए जाने हैं जबकि दूसरी ओर कई रोजगार देने वाले क्षेत्र अच्छा नहीं कर रहे हैं और उन पर किसी का ध्यान नहीं है।
राजन ने कहा कि रोजगार की समस्या पिछले 10 सालों में पैदा नहीं हुई है। यह पिछले कुछ दशकों से बढ़ रही है। मैं यह नहीं कह रहा हूं कि हमें अब चमड़ा उद्योग के लिए सब्सिडी की पेशकश करने की आवश्यकता है, लेकिन हमें यह पता लगाना चाहिए कि वहां क्या गलत हो रहा है और हमें कोशिश करनी चाहिए कि इसमें सुधार हो।
रघुराम राजन साल 2013 से 2016 तक रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के 23वें गवर्नर थे।
राजन बोले- PHD वाले चपरासी के लिए आवेदन कर रहे
राजन ने कहा कि बेरोजगारी की संख्या बहुत ज्यादा है। वहीं, छिपी हुई बेरोजगारी और भी अधिक है। श्रम शक्ति की भागीदारी कम है, महिला श्रम शक्ति की भागीदारी वास्तव में खतरनाक रूप से कम है। इसके बारे में सबको पता है और मुझे विस्तार से बताने की जरूरत नहीं है।
हालांकि, उन्होंने कहा कि हाल के दिनों में कृषि और नौकरियों की हिस्सेदारी बढ़ रही है। बेरोजगारी का असर उच्च शिक्षित लोगों के सरकारी नौकरियों के लिए आवेदन करने की संख्या देखने से पता पता है। PHD वाले रेलवे में चपरासी के पद पर नौकरी के लिए आवेदन कर रहे हैं।
ग्रोथ की हाइप को लेकर गलती कर रहा भारत
इससे पहले हाल ही में रघुराम राजन ने न्यूज एजेंसी ब्लूमबर्ग को दिए इंटरव्यू में कहा था कि भारत अपनी स्ट्रॉन्ग इकोनॉमिक ग्रोथ के बारे में ‘हाइप’ पर भरोसा करके एक बड़ी गलती कर रहा है। देश में सिग्निफिकेंट स्ट्रक्चरल प्रॉब्लम्स हैं, जिन्हें दूर करने की जरूरत है। तभी भारत अपनी पूरी क्षमता से विकास कर सकता है।
उन्होंने 2047 तक भारत को एक विकसित अर्थव्यवस्था वाला देश बनाने के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लक्ष्य को खारिज कर दिया था। रघुराम ने कहा था कि इस लक्ष्य की बात करना ‘नॉनसेंस’ है। आपके बहुत से बच्चों के पास हाईस्कूल की शिक्षा नहीं है और स्कूल छोड़ने की दर बहुत ज्यादा है।