सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्कआईटीडीसी इंडिया ईप्रेस / आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया यानी RBI की कार्रवाई के बाद पेटीएम की कंपनी पेटीएम पेमेंट्स बैंक लिमिटेड के दो इंडिपेंडेंट डायरेक्टर्स ने रिजाइन कर दिया है। सूत्रों के मुताबिक, शिंजिनी कुमार और मंजू अग्रवाल कंपनी के बोर्ड से हट गई हैं।

पेटीएम पेमेंट्स बैंक के बोर्ड में अब केवल तीन इंडिपेंडेंट डायरेक्टर

पेटीएम पेमेंट्स बैंक के बोर्ड में अब केवल तीन इंडिपेंडेंट डायरेक्टर रह गए हैं। इनमें पंजाब एंड सिंध बैंक के पूर्व एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर अरविंद कुमार जैन, एक्सेंचर के पूर्व MD पंकज वैश्य और DPIIT के पूर्व सेक्रेटरी रमेश अभिषेक शामिल हैं। हालांकि, डायरेक्टर्स के इस्तीफे पर कंपनी की ओर से अब तक कोई बयान नहीं आया है।

शिंजिनी कुमार पेटीएम पेमेंट्स बैंक से पहले सिटीबैंक, पीडब्ल्यूसी इंडिया और बैंक ऑफ अमेरिका मेरिल लिंच में काम कर चुकी हैं। वहीं मंजू अग्रवाल ने 34 साल तक SBI में कई पदों पर काम किया। वे डिप्टी MD पद से रिटायर हुईं थीं।

पेटीएम ने ग्रुप एडवाइजरी कमेटी बनाई

वहीं RBI की कार्रवाई के बाद पेटीएम की पेरेंट कंपनी वन-97 कम्युनिकेशंस (OCL) के बोर्ड ने 9 फरवरी यानी शुक्रवार को एक ग्रुप एडवाइजरी कमेटी बनाई है। कंपनी ने बताया कि कंप्लायंस और रेगुलेटरी मामलों को और मजबूत करने में बोर्ड के साथ काम करने के लिए ग्रुप एडवाइजरी कमेटी का गठन किया गया है।

पूर्व सेबी चीफ एम. दामोदरन कमेटी की अध्यक्षता करेंगे

पूर्व सेबी चीफ एम. दामोदरन इस कमेटी की अध्यक्षता करेंगे। इस कमेटी में इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (ICAI) के पूर्व प्रेसिडेंट मुकुंद मनोहर चितले जैसे अनुभवी प्रोफेशनल्स शामिल हैं, जिन्हें RBI ने नॉमिनेट किया था।

चितले बैंकिंग कोड्स एंड स्टैंडर्ड्स बोर्ड ऑफ इंडिया (NACAS) के पूर्व गवर्निंग काउंसिल मेंबर भी रहे हैं। चितले के अलावा, पैनल में आंध्रा बैंक के पूर्व चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर आर.रामचंद्रन जैसे बैंकिंग एक्सपर्ट्स भी शामिल हैं।

पेटीएम पेमेंट्स बैंक पर 31 जनवरी को RBI ने लगाई थी रोक

RBI ने 31 जनवरी को प्रूडेंशियल रेगुलेशन यानी नियमों का लंबे समय तक अनुपालन न करने का हवाला देते हुए पेटीएम पेमेंट्स बैंक पर बड़े बिजनेस रिस्ट्रिक्शंस यानी प्रतिबंध लगाए हैं। RBI को पेटीएम की KYC में बड़ी अनियमितताएं मिली थी, जिससे ग्राहक सीरियस रिस्क में आ गए थे।

पेटीएम ने लाखों ग्राहकों की KYC नहीं की थी। लाखों अकाउंट का पैन वैलिडेशन नहीं हुआ था। मल्टीपल कस्टमर्स के लिए सिंगल पैन का इस्तेमाल हो रहा था। कई मौकों पर RBI को बैंक की ओर से गलत जानकारी भी दी गई। आरबीआई को बड़ी संख्या में निष्क्रिय खाते भी मिले थे।

पेटीएम के खिलाफ RBI के आदेश की खास बातें:

29 फरवरी के बाद पेटीएम पेमेंट बैंक के अकाउंट में पैसा जमा नहीं किया जा सकेगा। इस बैंक के जरिए वॉलेट, प्रीपेड सर्विसेज, फास्टैग और दूसरी सर्विसेज में पैसा नहीं डाला जा सकेगा। हालांकि इंटरेस्ट, कैशबैक और रिफंड कभी भी अकाउंट में क्रेडिट हो सकेगा।

इस बैंक के ग्राहकों के सेविंग अकाउंट, करंट अकाउंट, प्रीपेड उपकरण, फास्टैग, नेशनल कॉमन मोबिलिटी कार्ड आदि में मौजूद पैसों के विड्रॉल या उपयोग पर किसी तरह की कोई पाबंदी नहीं है। बैलेंस अवेलेबल होने तक इसका इस्तेमाल किया जा सकेगा।

दूसरे नंबर के पॉइंट में बताई गई सर्विसेज के अलावा 29 फरवरी 2024 के बाद कोई भी बैंकिंग सर्विस प्रोवाइड करने की अनुमति पेटीएम पेमेंट बैंक के पास नहीं होगी। UPI सुविधा भी 29 फरवरी के बाद नहीं दी जा सकेगी।

वन97 कम्युनिकेशंस और पेटीएम पेमेंट्स सर्विसेज के नोडल अकाउंट 29 फरवरी 2024 तक बंद होंगे। पाइपलाइन में मौजूद ट्रांजैक्शन और नोडल अकाउंट का सेटलमेंट 15 मार्च 2024 तक पूरा किया जाएगा। उसके बाद कोई और ट्रांजैक्शन की अनुमति नहीं होगी।

पेटीएम ने 29 फरवरी की डेडलाइन आगे बढ़ाने की मांग की मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, पेटीएम ने RBI से 29 फरवरी से पेटीएम पेमेंट बैंक पर लगाई गई रोक की डेडलाइन को आगे बढ़ने की रिक्वेस्ट की है। इसके साथ ही कंपनी ने वॉलेट बिजनेस और फास्टैग में लाइसेंस ट्रांसफर की स्थिति को लेकर क्लियरिटी मांगी है।