सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : राष्ट्रीय तकनीकी शिक्षक प्रशिक्षण एवं अनुसंधान संस्थान (एनआईटीटीटीआर), भोपाल में सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के मूल सिद्धांत विषय पर एक विशेष व्याख्यान सत्र आयोजित किया गया। इसे मुख्य वक्ता विनोद कुमार तिवारी, माननीय सूचना आयुक्त, केंद्रीय सूचना आयोग नई दिल्ली ने संबोधित किया। इस व्याख्यान का उद्देश्य प्रतिभागियों को आरटीआई अधिनियम के मूल सिद्धांतों, इसके क्रियान्वयन में आने वाली चुनौतियों और सर्वोत्तम प्रथाओं के बारे में जानकारी देना था, जिससे संस्थानों में पारदर्शिता को मजबूत किया जा सके और कानून का प्रभावी अनुपालन सुनिश्चित हो। तिवारी ने उपस्थित नोडल अधिकारियों और संबंधित कर्मचारियों को संबोधित करते हुए कहा कि सूचना का अधिकार केवल एक कानूनी प्रावधान नहीं, बल्कि प्रशासन में पारदर्शिता और नागरिकों की भागीदारी सुनिश्चित करने वाला सामाजिक उपकरण है। उन्होंने बताया कि आरटीआई के सफल क्रियान्वयन से नागरिक संतुष्टि दर लगभग 95% है। अधिकारियों की जिम्मेदारी है कि वे समय पर जनधन और सार्वजनिक संसाधनों की सही जानकारी जनता को उपलब्ध कराएँ। तिवारी ने नए संशोधनों, लैंडमार्क निर्णयों के नियमों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने अधिक जानकारी देने की प्रोत्साहना की और कहा कि जानकारी में कमी) नागरिकों के अधिकारों के लिए चुनौती बनती है। इस अवसर पर उन्होंने प्रतिभागियों के प्रश्नों के भी स्पष्ट उत्तर दिए और कहा कि आने वाली पीढ़ी के लिए ऐसी विरासत छोड़ें जिसमें शासन-प्रशासन में पारदर्शिता हो। एनआईटीटीटीआर भोपाल के निदेशक चन्द्र चारू त्रिपाठी ने सत्र की सराहना करते हुए इसे सभी उपस्थित अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बताया। सत्र में मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश के विभिन्न संस्थानों के निदेशक, कुलसचिव, अधिकारी व कर्मचारी, सेवानिवृत्त विजय लक्ष्मी तिवारी, प्रो. आर.के. दीक्षित, मेजर निशांत कुमार सहित अन्य उपस्थित थे। प्रशासनिक अधिकारी गौतम कुमार सिंह ने सत्र का संचालन किया। यह कार्यक्रम पारदर्शिता, उत्तरदायित्व और आरटीआई अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन पर केंद्रित रहा और अधिकारियों को संस्थागत कार्यप्रणाली को अधिक प्रभावी और जिम्मेदार बनाने का मार्गदर्शन प्रदान किया एनआईटीटीटीआर भोपाल के निदेशक चन्द्र चारू त्रिपाठी ने तिवारी के ज्ञानवर्धक सत्र की सराहना करते हुए कहा कि आज का सत्र सभी उपस्थित अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण था। पारदर्शिता और जवाबदेही हमारे संस्थान की मुख्य प्राथमिकताओं में शामिल हैं।

तिवारी ने जिस स्पष्टता और व्यावहारिक दृष्टिकोण से आरटीआई अधिनियम और उसके सफल क्रियान्वयन पर प्रकाश डाला, उससे अधिकारियों को न केवल नागरिकों के प्रति अपने दायित्वों की पूरी समझ मिली, बल्कि संस्थागत कार्यप्रणाली को और अधिक प्रभावी और जिम्मेदार बनाने की दिशा में भी मार्गदर्शन मिला। आरटीआई के सफल क्रियान्वयन के लिए संस्थागत प्रक्रियाओं का सरल और स्पष्ट होना आवश्यक है और कर्मचारियों को नियमित प्रशिक्षण एवं मार्गदर्शन प्रदान किया जाना चाहिए। यह सत्र पारदर्शिता, उत्तरदायित्व और आरटीआई अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन पर केंद्रित रहा, जिसमें मध्यप्रदेश एवं उत्तरप्रदेश के विभिन्न संस्थानों के निदेशक, कुलसचिव, व से सम्बंधित अधिकारी व कर्मचारी, श्रीमती विजय लक्ष्मी तिवारी, संस्थान के आर.के दीक्षित , मेजर निशांत कुमार व अन्य उपस्थित थे। सत्र का संचालन प्रशासनिक अधिकारी गौतम कुमार सिंह द्वारा किया गया। भोपाल के निदेशक चन्द्र चारू त्रिपाठी ने श्तिवारी के ज्ञानवर्धक सत्र की सराहना करते हुए कहा कि आज का सत्र सभी उपस्थित अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण था। पारदर्शिता और जवाबदेही हमारे संस्थान की मुख्य प्राथमिकताओं में शामिल हैं। तिवारी ने जिस स्पष्टता और व्यावहारिक दृष्टिकोण से आरटीआई अधिनियम और उसके सफल क्रियान्वयन पर प्रकाश डाला, उससे अधिकारियों को न केवल नागरिकों के प्रति अपने दायित्वों की पूरी समझ मिली, बल्कि संस्थागत कार्यप्रणाली को और अधिक प्रभावी और जिम्मेदार बनाने की दिशा में भी मार्गदर्शन मिला। आरटीआई के सफल क्रियान्वयन के लिए संस्थागत प्रक्रियाओं का सरल और स्पष्ट होना आवश्यक है और कर्मचारियों को नियमित प्रशिक्षण एवं मार्गदर्शन प्रदान किया जाना चाहिए।
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