सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस / आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव द्वारा राज्य को डेयरी उत्पाद में अग्रणी बनाने की संकल्पना पर आगामी 4 एवं 5 जुलाई 2025 को इंडियन डेयरी एसोसिएशन पश्चिम क्षेत्र एवं विक्रम विश्वविद्यालय, उज्जैन के संयुक्त तत्वावधान में “मध्य प्रदेश में डेयरी विकास: संभावनाएं एवं चुनौतियां”विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया जा रहा है।इसके आयोजन समिति की बैठक में कार्यक्रम की तैयारियों को लेकर दिशा-निर्देश दिये गये और दायित्वों का विभाजन करके कार्रवाई की समीक्षा प्रतिदिन किए जाने का निर्धारण किया गया ।
विक्रम विश्वविद्यालय उज्जैन के कुलसचिव अनिल कुमार शर्मा ने जानकारी देते हुए बताया कि,दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी के सफल आयोजन हेतु गठित समितियों की बैठक विक्रम विश्वविद्यालय के कार्यपरिषद सभागार में कुलगुरू प्रो अर्पण भारद्वाज की अध्यक्षता में आयोजित की गई ।
बैठक में भारतीय डेयरी संघ पश्चिम क्षेत्र के पदाधिकारी श्री जी आर दारू वाला, नंदन गुप्ता और सुभाष गुप्ता शामिल हुए,वहीं विक्रम विश्वविद्यालय की ओर विभागाध्यक्षों,समिति प्रभारियों और सेमिनार के लिए गठित विभिन्न समितियों के सदस्य सम्मिलित हुए।
बैठक में कुलगुरू प्रो अर्पण भारद्वाज ने बताया कि विक्रम विश्वविद्यालय माननीय मुख्यमंत्री मोहन यादव द्वारा घोषित किए गए डेयरी टेक्नोलॉजी के पाठ्यक्रम को प्रारंभ किए जाने और मध्यप्रदेश में दुग्ध उत्पादनों को बढ़ाने की दिशा में तेजी कार्य किये जाने की मुख्यमंत्री यादव की संकल्पना पर यह राष्ट्रीय स्तर का आयोजन किया जा रहा है ।
भारतीय डेयरी संघ के पदाधिकारी जी आर दारूवाला ने बैठक में भारतीय डेयरी संघ के बारे में बताया कि 1948 में स्थापित डेयरी संघ (आईडीए) भारत में डेयरी उद्योग का शीर्ष निकाय है। इसके सदस्य सहकारी समितियों, बहुराष्ट्रीय कंपनियों, कॉर्पोरेट निकायों, निजी संस्थानों, शैक्षणिक संस्थानों, सरकारी और सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों से हैं। आईडीए भारत में डेयरी के विकास से जुड़े डेयरी उत्पादकों, पेशेवरों और योजनाकारों, वैज्ञानिकों और शिक्षाविदों, संस्थानों और संगठनों के साथ मिलकर काम करता है। आईडीए (पश्चिम क्षेत्र) भारत के पांच प्रमुख राज्यों गुजरात, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और गोवा में डेयरी क्षेत्र को बढ़ावा देने में सक्रिय रूप से लगा हुआ है। यह संघ सभी हितधारकों, प्राथमिक दूध उत्पादक से लेकर आपूर्ति श्रृंखला में सभी और उपभोक्ताओं की मदद करने के लिए कार्यरत हैं। लाखों किसानों के हितों की रक्षा करना आईडीए का नैतिक कर्तव्य है, जो दूध के व्यवसाय पर निर्भर हैं और साथ ही उन्हें स्वस्थ, पौष्टिक दूध उत्पाद प्रदान करके लाखों उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करना भी आईडीए का नैतिक कर्तव्य है। आईडीए (पश्चिम क्षेत्र) प्रत्येक व्यक्ति तक पहुँचने की योजना बना रहा है।इसीलिए यह आयोजन किये जा रहे हैं ।
बैठक में आईडीए के पदाधिकारी नंदन गुप्ता ने बताया कि संगोष्ठी का उद्देश्य मध्य प्रदेश में डेयरी क्षेत्र बहुत ही महत्वपूर्ण दिशा की ओर अग्रसर है और राज्य सरकार ने देश के कई हिस्सों में प्राप्त सफलताओं को दोहराने के लिए डेयरी में वृद्धि को गति देने के लिए तैयारी की हुई है। राज्य डेयरी फेडरेशन के प्रकल्प सांची को संभालने के लिए मध्य प्रदेश सरकार और एनडीडीबी के बीच नवीनतम समझौता इस लक्ष्य की दिशा में एक कदम है। विक्रम विश्वविद्यालय में डेयरी प्रौद्योगिकी डिग्री कार्यक्रम शुरू करने की दूसरी पहल डेयरी उद्योग के लिए प्रशिक्षित जनशक्ति विकसित करने में मदद करेगी। भारतीय डेयरी संघ (पश्चिम क्षेत्र) एक शीर्ष निकाय है जो डेयरी क्षेत्र के विभिन्न हितधारकों का प्रतिनिधित्व करता है और इसलिए डेयरी पेशेवरों, शिक्षाविदों, उद्योग, किसानों और नीति-निर्माताओं को एक साथ लाने की इसकी जीवंतता गति को तेज कर सकती है। इस प्रकार, इस संगोष्ठी का उद्देश्य ज्ञान के आदान-प्रदान को बढ़ावा देना, डेयरी क्षेत्र में नवाचारों को उजागर करना और राज्य में वास्तविक डेयरी उत्पादों के लिए उपभोक्ता जागरूकता बढ़ाना है। प्रतिष्ठित विशेषज्ञ और पैनलिस्ट दूध उत्पादन और उत्पादकता बढ़ाने, चारा और चारा संसाधनों का अनुकूलन करने, स्मार्ट डेयरी फार्मिंग प्रथाओं को लागू करने और अत्याधुनिक उत्पादन तकनीकों को अपनाने सहित विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों का पता लगाएंगे। चर्चाओं में कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डिजिटलीकरण, विपणन रणनीतियों, सुरक्षा और गुणवत्ता मानकों तथा उद्योग के कार्बन उत्सर्जन को कम करने के लिए टिकाऊ दृष्टिकोण के व्यापक पहलुओं को भी शामिल किया जाएगा।
बैठक में मंच सज्जा, दुग्ध संघ द्वारा लगाए जाने वाले तकनीकी स्टॉल, और बैठक व्यवस्था के संबंध में चर्चा की गई। ज्ञात को की विक्रम विश्वविद्यालय द्वारा इसी सत्र से बीटेक डेरी टेक्नोलॉजी का पाठ्यक्रम भी प्रारंभ किया जा रहा है।
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