4. सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : केन्द्रीय योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा अनुसंधान परिषद, आयुष मंत्रालय (भारत सरकार) के तत्वावधान में संत हिरदाराम मेडिकल कॉलेज ऑफ नेचुरोपैथी एण्ड यौगिक सांइसेस फॉर वूमन, भोपाल द्वारा मोटापे के लिए योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा इंटरवेंशन कार्यक्रम के अंतर्गत एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन को किया गया। कार्यक्रम का मुख्‍य उद्देश्‍य मोटापे से ग्रसित लोगों के लिए योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा के माध्यम से उपचार को बढ़ावा देना रहा। जिसमें मुख्‍य अतिथि के रूप में पधारे श्री मुकेश दीक्षित, (सचिव क्षेत्रीय संगठन आरोग्‍य भारती), अतिथि वक्‍ता डॉ. जया देशमुख (डायरेक्टर कोगनीकेयर न्यूरोबिक्स), डॉ. चंद्रशेखरन (हेड, सेंटर फॉर योगा इन पब्लिक हेल्थ रिसर्च एट सेंटर फॉर क्रोनिक डिजिज़ कंट्रोल, सी.सी.डी.सी.), डॉ. अभिजीत देशमुख (गेस्ट्रो लेपरोस्सकोपी सर्जन, आरोग्य भारती मध्य भारत प्रांत उपाध्यक्ष, अध्यक्ष भोपाल महानगर), डॉ. विवेक भारतीय (चीफ मेडिकल ऑफिसर, आरोग्य मंदिर, रायपुर), ने विशेषज्ञ के रूप में अपना व्याख्यान दिया।

कार्यक्रम में मुख्‍य अतिथि के रूप में पधारे श्री मुकेश दीक्षित ने अपने उद्धबोधन में कहा कि स्‍वास्‍थ्‍य सेवा का विषय है। केवल दवा कराना ही सेवा नहीं है, लोग सदैव स्‍वस्‍थ रहें उसके लिए हमें प्रयास करना जरूरी है और वही सच्‍ची सेवा है। साथ ही उन्‍होंने बताया कि पहले के समय में घरों में हमारी दादी, नानी एवं माताऍं सब जानती थी। घर का रसोईघर ही औषधालय होता था। उन्‍हें परंपरागत ज्ञान था ताकि कभी अस्‍पतालों के चक्‍कर न लगाना पड़े। परन्‍तु आज कल की जीवन शैली में फैमिली डॉक्‍टर की संस्‍कृति बहुत बढ़ गई है। नारी शक्ति जागृत हो जाए तो भारत को विश्‍व गुरू बनने से कोई नहीं रोक सकता। उन्‍होंने आगे बताया कि आज कल की पीड़ी आधुनिक पीड़ी है परन्‍तु आधुनिक बनने के कारण रात को समय से सोना, समय से उठना, खान-पान सब बिगड़ता जा रहा है। जिसे सुधारने की बहुत जरूरत है और हमें यह सब सिर्फ भाषण से नहीं आचरण से सुधारना होगा।

अतिथि वक्‍ता के रूप में पधारी विषय विशेषज्ञ जया देशमुख ने अपने उद्धबोधन में कहा कि बीमारियों पर खर्च करने से बेहतर है कि व्‍यक्ति अपने खान-पान पर खर्च करे। जिससे शरीर कभी अस्‍वस्‍थ नहीं होगा एवं अस्‍पताल के चक्‍करों से भी छुटकारा मिलेगा। साथ ही उन्‍होंने बताया कि पोष्टिक भोजन के साथ-साथ व्‍यक्ति में सकारात्‍मक सोच का होना भी बहुत आवश्‍यक है। इसी के साथ व्‍यक्ति के गट हेल्‍थ का स्‍वस्‍थ होना भी अत्‍यावश्‍यक है जिससे पूरे शरीर को जरूरी खनिज, पोषण एवं प्रोटीन मिलता है।

डॉ. विवेक भारतीय ने अपने वक्‍तव्‍य में बताया कि पहले ऐसा माना जाता था कि जब देव नाराज हों तब बीमारी होती थी। उस समय प्रकृति में असंतुलन के कारण बीमारी होती है। इस पर और शोध किया गया और ऐसे कार्यों को प्रोत्‍साहित किया गया जो शरीर को कम से कम नुकसान पहुंचाए। उसके बाद बीमारी का कारण विषाणु माने जाने लगे और तब एण्‍टीबायोटिक का निर्माण हुआ। उसके पश्‍चात आज के दौर में प्राकृतिक चिकित्‍सा और योग के द्वारा हर समस्‍या का समाधान सम्‍भव हुआ है। उन्‍होंने कहा कि हमें गोल अर्थात लक्ष्‍य बनाना है अथवा स्‍वयं गोल (मोटे होना है) यह निर्णय हमारे हाथ में है। अपने बिन्‍दुओं पर विस्‍तार करते हुए उन्‍होंने मोटापा नियत्रंण के लिए पांच महत्‍वपूर्ण तत्‍वों पर प्रकाश डाला। जिनमें पांच प्रकार का व्‍यायाम, डाईट, नींद, भावनात्‍मक स्‍वास्‍थ और प्राकृतिक चिकित्‍सा शामिल है। सुबह के सत्र में डाक्‍टर विवेक भारतीय ने युवाओं को जुम्‍बा करवाया। जिसकी उर्जा देखने लायक थी।

कार्यक्रम के अंत में डॉ. अभिजीत देशमुख (गेस्ट्रो लेपरोस्सकोपी सर्जन, आरोग्य भारती मध्य भारत प्रांत उपाध्यक्ष, अध्यक्ष भोपाल महानगर) ने कहा कि माननीय प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी जी ने पदभार ग्रहण करते ही स्‍वच्‍छता की अलख जगाई थी। जिसके कारण संक्रमित बीमारियों पर नियंत्रण पाना संभव हुआ और इस वर्ष 15 अगस्‍त पर उन्‍होंने लाल किले की प्राचीर से असंक्रमित बीमारियों को नियंत्रित करने के लिए जीवनशैली प्रबंधन की ओर भारत के युवाओं को जागरूक किया है। उन्‍होंने युवा डॉक्‍टर्स का अव्‍हान करते हुए कहा कि आप न सिर्फ मरीजों का उपचार करें बल्कि उनका फालोअप भी अवश्‍य करें।

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