सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : देश के कई हिस्सों में लगातार बारिश और नदियों के बढ़ते जलस्तर ने चिंता बढ़ा दी है। वाराणसी में गंगा का जलस्तर बढ़ने से काशी के 84 घाट पानी में डूब गए हैं। घाटों से जुड़ी करीब पांच हजार दुकानें बंद हो गई हैं, जबकि लगभग तीन हजार नावों का संचालन भी रोक दिया गया है। इससे घाटों पर निर्भर दुकानदारों, नाविकों और अन्य छोटे कारोबारियों की आजीविका प्रभावित हुई है।
गंगा के बढ़ते जलस्तर का असर काशी के प्रमुख श्मशान घाटों पर भी पड़ा है। मणिकर्णिका और हरिश्चंद्र घाट के निचले हिस्से जलमग्न होने से अंतिम संस्कार की व्यवस्था प्रभावित हुई है। बारिश और बाढ़ के कारण लकड़ियां भीगने से शवदाह में अधिक समय लग रहा है और कई स्थानों पर वैकल्पिक जगहों का सहारा लेना पड़ रहा है।
बिहार में भी गंगा और उसकी सहायक नदियों के बढ़ते जलस्तर से कई जिलों में बाढ़ जैसे हालात बने हुए हैं। भागलपुर, पटना, बेगूसराय और अन्य इलाकों में तटबंधों के क्षतिग्रस्त होने और पानी फैलने से बड़ी आबादी प्रभावित हुई है। भागलपुर के राघोपुर क्षेत्र में बांध टूटने के बाद हजारों लोग और बड़ी संख्या में घर प्रभावित हुए हैं। प्रशासन ने राहत एवं बचाव कार्य तेज कर दिए हैं।
मध्य प्रदेश में भी भारी बारिश का दौर जारी है। राज्य के कई जिलों में नदियों और जलाशयों का जलस्तर बढ़ा है तथा बाढ़ और जलभराव की स्थिति सामने आई है। मौसम विभाग के अलर्ट के बीच प्रशासन को संवेदनशील क्षेत्रों में सतर्क रहने और राहत-बचाव की तैयारियां मजबूत रखने के निर्देश दिए गए हैं। लगातार बारिश से सड़क, पुल, आवागमन और जनजीवन प्रभावित होने की आशंका बनी हुई है।
देश के अलग-अलग हिस्सों में बारिश और बाढ़ की स्थिति यह संकेत देती है कि मानसून के दौरान स्थानीय प्रशासन, राहत एजेंसियों और नागरिकों को अतिरिक्त सतर्कता बरतने की जरूरत है। जलस्तर बढ़ने वाले क्षेत्रों में अनावश्यक आवाजाही से बचना और प्रशासन द्वारा जारी सुरक्षा निर्देशों का पालन करना महत्वपूर्ण होगा।
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