आज की दुनिया में नकारात्मकता (नेगेटिविटी) का वातावरण हर ओर फैला हुआ है। ऐसे में हममें से अधिकतर लोग जीवन के किसी न किसी पहलू में दरिद्रता का अनुभव करते रहते हैं—चाहे वह आर्थिक हो, मानसिक हो या सामाजिक। इसका परिणाम यह होता है कि हम अपने पास उपलब्ध संसाधनों का न तो सही तरह से आनंद ले पाते हैं और न ही उनमें समुचित वृद्धि कर पाते हैं।
अक्सर लोग अपनी परिस्थितियों में सुधार के बजाय उन्हें लेकर शिकायतें करते हैं, और यही प्रवृत्ति जीवन की खुशियों को कम कर देती है।
मानव जीवन का पूर्ण आनंद लेने के लिए आवश्यक है कि हम हर स्थिति में सकारात्मक (पॉजिटिव) बने रहें और इसके लिए निरंतर प्रयास करते रहें। सकारात्मकता हमारे जीवन के लिए उतनी ही जरूरी है जितनी हमारे शरीर के लिए ऑक्सीजन। इसके माध्यम से ही हम तन, मन और धन को स्वस्थ एवं संतुलित रख सकते हैं।
एक रोचक उदाहरण से इसे समझा जा सकता है—एक छोटे से नवजात मच्छर ने अपने पहले सांस्कृतिक भ्रमण के बाद पिता से कहा, “पापा, दुनिया बहुत ही अच्छी है। जहाँ भी गया, सभी लोग तालियाँ बजाकर मेरा स्वागत कर रहे थे।” यह दृष्टिकोण भले ही भोला लगे, पर यह सिखाता है कि परिस्थितियों को देखने का नजरिया ही हमारा अनुभव तय करता है। यही है सकारात्मक सोच।
हालाँकि, सकारात्मक बने रहने के लिए हमें केवल सोच ही नहीं, बल्कि मानसिक मजबूती की भी आवश्यकता होती है। इसके लिए हमें महान व्यक्तित्वों की वाणी, साहित्य और प्रेरणादायक गीतों से निरंतर ऊर्जा प्राप्त करनी चाहिए।
जैसे एक लोकप्रिय भक्ति गीत की पंक्तियाँ—
“इतनी शक्ति हमें देना दाता, मन का विश्वास कभी कमजोर हो न…”
ये शब्द हमें यह भरोसा दिलाते हैं कि सही दृष्टिकोण और मजबूत विश्वास के साथ हम किसी भी कठिनाई का सामना कर सकते हैं।
— डॉ. रतन सूर्यवंशी
डायरेक्टर एवं वित्त नियंत्रक, म.प्र. भोज (मुक्त) विश्वविद्यालय, भोपाल; सामाजिक कार्यकर्ता एवं चिंतक; मध्य प्रदेश मानव अधिकार आयोग के पूर्व जिला संयोजक

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