सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्कआईटीडीसी इंडिया ईप्रेस / आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल: IIT मद्रास के पूर्व छात्र पवन दावुलुरी को माइक्रोसॉफ्ट विंडोज और सर्फेस का चीफ बनाया गया है। दावुलुरी ने लंबे समय से प्रोडक्ट हेड रहे पैनोस पानाय का जगह लिया है। पानाय ने पिछले साल अमेजन जॉइन करने के लिए डिपार्टमेंट छोड़ दिया था।

दावुलुरी इससे पहले सरफेस ग्रुप को हेड करते थे, जबकि मिखाइल पारखिन विंडोज डिपार्टमेंट के हेड थे। इन दोनों के पद छोड़ने के बाद, पवन ने विंडोज़ और सरफेस दोनों डिपार्टमेंट्स का कार्यभार संभाल लिया है।

एक्सपीरियंस एंड डिवाइसेस हेड राजेश झा को रिपोर्ट करेंगे

दावुलुरी करीब 23 साल पहले माइक्रोसॉफ्ट से जुड़े थे। इससे पहले उन्होंने मैरीलैंड यूनिवर्सिटी से पोस्ट ग्रेजुएशन किया था। वे अब कंपनी के एक्सपीरियंस एंड डिवाइसेस हेड राजेश झा को रिपोर्ट करेंगे।

राजेश झा ने इस बात की जानकारी दी है। उन्होंने कहा कि इस बदलाव के रूप में हम विंडोज एक्सपिरिएंस और विंडोज+ डिवाइसेज के टीम को एक्सपीरिएंस + डिवाइसेज (E+D) डिवीजन के कोर पार्ट को एक साथ ला रहे हैं।

माइक्रोसॉफ्ट की 4 दशक की यात्रा

1975 में बिल गेट्स ने अपने बचपन के दोस्त पॉल एलेन के साथ मिल कर अल्टेयर 8800 माइक्रो कंप्यूटर के लिए अपना पहला बेसिक प्रोग्रामिंग कोड (इंटरप्रेटर) बनाया।

जून 1980 में गेट्स ने हार्वर्ड के क्लासमेट स्टीव बाल्मर को कंपनी का पहला बिजनेस मैनेजर बनाया।

अगस्त 1981 में माइक्रोसॉफ्ट ने अपना नया ऑपरेटिंग सॉफ्टवेयर ‘माइक्रोसॉफ्ट डिस्क ऑपरेटिंग सिस्टम’ (MS-DOS) रिलीज किया, जो IBM पर्सनल कंप्यूटर पर रन करता था।

1983 में माइक्रोसॉफ्ट ने नया सॉफ्टवेयर ‘Windows’ अनाउंस किया। इसका टारगेट MS-DOS को विजुअल इफेक्ट्स के जरिए और बेहतर बनाना था।

1985 में कंपनी ने ‘Windows 1.0’ को यूजर्स के लिए लॉन्च कर दिया। इसी साल स्क्रीन या विंडोज के काम को माउस के जरिए करना शुरू कर दिया।

1986 में कंपनी ने अपना हेडक्वर्टर रेडमंड, वॉशिंगटन शिफ्ट कर लिया। यहां कंपनी ने 21 डॉलर प्रति शेयर के हिसाब से 60 मिलियन डॉलर जुटाए।

1988- 1987 में Windows 2.0 के लॉन्च होने के साथ ही कंप्यूटर अब ऑफिस में यूज होने लगा। इसी साल गूगल सेल के आधार पर कंपनी पर्सनल कंप्यूटर (PC) सॉफ्टवेयर के मामले में सबसे बड़ी कंपनी बन गई।

1990-1995: 1990 में Windows 3.0 के लॉन्च के 5 साल बाद Windows 95 लॉन्च हुआ, जिसकी 10 लाख से ज्यादा कॉपी केवल 4 दिन में सेल हो गई।

1995 में इंटरनेट के आने के बाद कंपनी ने अपना पहला वेब ब्राउजर ‘Internet Explorer’ लॉन्च किया।

1998: Windows 98, विंडोज का पहला कंप्यूटर बेस्ड वर्जन रिलीज किया गया। इसी दौरान कंपनी को यूएस सरकार के साथ एंटिट्रस्ट (अविश्वास) के मामले में कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ी।

2000: जनवरी में बाल्मर को नया CEO बनाया गया।

2001: 1998 की कानूनी लड़ाई खत्म हो गई और कंपनी ने इसी साल नवंबर में गेमिंग इंडस्ट्री में अपना कदम रखा और Xbox गेमिंग कंसोल लॉन्च किया।

2005: नवंबर में Xbox का नेक्स्ट जेनरेशन Xbox 360 की सेल शुरू हुई।

2006: नवंबर में कंपनी ने Zune पोर्टेबल म्यूजिक प्लेयर लॉन्च किया। लेकिन यह मार्केट में सक्सेस नहीं हुआ और 2012 में कंपनी ने इसे डिस्कंटीन्यू कर दिया।

2007 में कंपनी ने Windows Vista लॉन्च किया। यह तब का लेटेस्ट ऑपरेटिंग सिस्टम था।

2009 में गूगल को चैलेंज करने के लिए कंपनी ने Bing नाम का सर्च इंजन लॉन्च किया।

2010: एपल iPhone और गूगल के एंड्रॉयड डिवाइस के बने हुए मार्केट में माइक्रोसॉफ्ट ने अपनी पहली Windows फोन लॉन्च किया।

2012: कंपनी ने सरफेस टैबलेट और Windows 8 ऑपरेटिंग सिस्टम लॉन्च किया। लेकिन यहां भी उम्मीद के मुताबिक सक्सेस नहीं मिली।

2013 में कंपनी के CEO बाल्मर ने एक साल के भीतर कंपनी छोड़ने की घोषणा कर के सबको चौंका दिया।

4 फरवरी 2014: माइक्रोसॉफ्ट की बोर्ड ने सर्वसम्मति से भारतीय मूल के एग्जीक्यूटिव सत्या नडेला को कंपनी का नया CEO चुना। कंपनी के 39 साल की यात्रा में सत्या तीसरे CEO थे। सत्या अभी तक माइक्रोसॉफ्ट के CEO हैं।