भारत के प्रमुख ज्वेलर्स संगठन ऑल इंडिया जेम एंड ज्वेलरी फेडरेशन (AIJGF) ने केंद्र सरकार को देश में ‘बुलियन बैंक’ यानी गोल्ड बैंकिंग सिस्टम शुरू करने का सुझाव दिया है। संगठन का मानना है कि इस मॉडल के जरिए घरों, मंदिरों और गोल्ड ETF में पड़े निष्क्रिय सोने को वित्तीय व्यवस्था में शामिल किया जा सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार भारत में बड़ी मात्रा में सोना घरों और धार्मिक संस्थानों में वर्षों से निष्क्रिय पड़ा हुआ है। यदि इसे बैंकिंग और वित्तीय प्रणाली से जोड़ा जाए तो देश की अर्थव्यवस्था को बड़ा लाभ मिल सकता है। इससे सोने के आयात पर निर्भरता कम होगी और विदेशी मुद्रा भंडार पर पड़ने वाला दबाव भी घटेगा।
AIJGF का कहना है कि बुलियन बैंकिंग सिस्टम लागू होने से ज्वेलरी उद्योग को भी स्थिरता मिलेगी। बैंक जमा सोने के आधार पर ऋण, निवेश और अन्य वित्तीय सेवाएं उपलब्ध करा सकेंगे। इससे गोल्ड मार्केट अधिक संगठित और पारदर्शी बनने की संभावना है।
आर्थिक जानकारों के मुताबिक भारत दुनिया के सबसे बड़े सोना उपभोक्ता देशों में शामिल है। हर साल बड़ी मात्रा में सोना आयात किया जाता है, जिससे विदेशी मुद्रा पर असर पड़ता है। ऐसे में यदि घरेलू स्तर पर उपलब्ध सोने का उपयोग बढ़ाया जाए तो आर्थिक संतुलन बेहतर हो सकता है।
सरकार पहले भी गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम जैसी योजनाएं ला चुकी है, लेकिन अपेक्षित सफलता नहीं मिल सकी। अब बुलियन बैंकिंग मॉडल को लेकर उद्योग जगत में नई चर्चा शुरू हो गई है।
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