सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क – आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस / आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल / नई दिल्ली : भारत और पाकिस्तान के बीच व्यापारिक संबंधों में आई दरार अब पाकिस्तान की जनता पर भारी पड़ रही है। कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले और उसके बाद भारतीय सेना द्वारा पाकिस्तान स्थित आतंकवादी शिविरों पर चलाए गए ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत ने मई 2025 में पाकिस्तान के साथ सभी प्रकार के व्यापार को आधिकारिक रूप से निलंबित कर दिया था।
इस फैसले का सीधा असर पाकिस्तान को मिलने वाली जरूरी दवाओं और टीकों पर पड़ा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, पिछले दो महीने से पाकिस्तान को दवा निर्यात की खेप सीमा शुल्क अड़चनों के कारण रोकी हुई है। इससे पाकिस्तान की जनता जीवनरक्षक दवाओं और टीकों के लिए तरस रही है।
भारत हर साल पाकिस्तान को करीब 20 करोड़ डॉलर (लगभग 1,754 करोड़ रुपये) मूल्य की दवाइयों का निर्यात करता रहा है। इसमें फॉर्मूलेशन, टीके, बल्क ड्रग्स और एक्टिव फार्मास्युटिकल इंग्रीडिएंट (API) शामिल होते हैं। वित्त वर्ष 2025 में यह निर्यात पिछले वर्ष की तुलना में 18 प्रतिशत की वृद्धि पर था। लेकिन मौजूदा भू-राजनीतिक हालातों और सुरक्षा कारणों के चलते यह पूरी तरह ठप हो गया है।
एक वरिष्ठ दवा निर्यातक ने बताया कि शुरुआत में कुछ हफ्तों तक पाकिस्तान को दवा निर्यात जारी रहा, लेकिन जल्द ही सीमा शुल्क निकासी पर रोक लगा दी गई। इसके चलते फार्मा कंपनियां भी नुकसान झेल रही हैं और पाकिस्तान की जनता को स्वास्थ्य संकट का सामना करना पड़ रहा है।
भारत के इस कड़े रुख ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि आतंकवाद को समर्थन देने की कीमत पाकिस्तान को हर क्षेत्र में चुकानी पड़ रही है।
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