सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क – आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस / आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : लोकतान्त्रिक अधिकार मोर्चा मध्यप्रदेश के नेतृत्व में भोपाल के नार्मदीय भवन में एक दिवसीय ऐतिहासिक ‘मनुवादी संघी फासीवाद विरोधी जन सम्मेलन’ का आयोजन हुआ। इस सम्मेलन में किसानों, मजदूरों, दलितों, आदिवासियों और अल्पसंख्यकों सहित लगभग 300 प्रगतिशील व जनवादी प्रतिनिधि जुटे। सभी ने सर्वसम्मति से संविधान की रक्षा और फासीवाद को परास्त करने का संकल्प लिया।


सम्मेलन का संचालन विजय कुमार और आभार सैयद जावेद अख्तर ने किया। क्रांतिकारी सांस्कृतिक मंच के साथियों ने जनगीत प्रस्तुत कर माहौल को जोश से भर दिया। सम्मेलन में वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि देश इस समय भाजपा-आरएसएस और कॉर्पोरेट गठजोड़ के फासीवादी शिकंजे में है, जो सामाजिक विभाजन, कॉर्पोरेट लूट और संवैधानिक संस्थाओं के क्षरण को चरम पर पहुँचा चुका है।
इतिहासकार रतनलाल ने कहा कि यह संघर्ष 1927 के महाड़ सत्याग्रह की वैचारिक निरंतरता है और मनुवादी ताकतों को हराए बिना समानता संभव नहीं। डॉ. जितेंद्र मीणा ने आदिवासी अधिकारों पर जोर देते हुए कहा कि गोंडवाना और भील प्रदेश की मांग अब संवैधानिक न्याय का प्रश्न बन चुकी है। वरिष्ठ नेता बुद्धसेन पटेल ने 52% ओबीसी आरक्षण को संवैधानिक अनिवार्यता बताया। वहीं, वरिष्ठ अधिवक्ता सैयद साज़िद अली ने मतपत्र आधारित चुनाव की मांग को लोकतंत्र बचाने की पहली शर्त बताया।

सम्मेलन में राष्ट्रपति को संबोधित एक ज्ञापन भी पारित किया गया, जिसमें छह सूत्रीय ‘न्याय संकल्प’ रखा गया। इसमें जातिगत जनगणना और आरक्षण, लोकतांत्रिक प्रक्रिया की बहाली, कॉर्पोरेट लूट पर रोक, शिक्षा व स्वास्थ्य में निजीकरण समाप्त करने, महिला- अल्पसंख्यक अधिकारों की गारंटी और सांप्रदायिक नामकरण की साज़िशों को रोकने जैसी प्रमुख माँगें शामिल थीं। सम्मेलन के अंत में मोनू यादव ने घोषणा की कि यह सम्मेलन संघर्ष की रणभेरी है और आरएसएस फासीवाद के खिलाफ व्यापक जन प्रतिरोध की निर्णायक शुरुआत है। उन्होंने सभी जनवादी ताकतों से आह्वान किया कि संविधान, लोकतंत्र और सामाजिक न्याय की रक्षा के लिए “जनपथ से न्यायपथ” तक संघर्ष को तेज़ किया जाए।

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