सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस / आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी धारक अब देश के किसी भी हॉस्पिटल में कैश-लेस इलाज करा सकेंगे। यानी बीमार होने पर किसी भी हॉस्पिटल में आपको इलाज के लिए पैसे नहीं देने पड़ेंगे। अब आपके इलाज का पूरा खर्चा बीमा कंपनी आपके बीमा कवर से कैश-लेस रूप में हॉस्पिटल को दे देगी। यह सुविधा आज यानी 25 जनवरी से शुरू हो गई है।
जनरल इंश्योरेंस काउंसिल ने कल यानी बुधवार (24 जनवरी) को ‘कैशलेस एवरीवेयर’ नाम से नए इनिशिएटिव की शुरुआत की है। इस बात की जानकारी जनरल इंश्योरेंस काउंसिल के चेयरमैन तपन सिंघल ने दी है। GIC को इंश्योरेंस रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (IRDAI) ने 2001 में गठित किया था। यह IRDAI और लाइफ इंश्योरेंस इंडस्ट्री के बीच लिंक का काम करती है।
अभी तक क्या सुविधा थी?
हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी होल्डर्स को पहले ये सुविधा तभी मिलती थी, जब उनके इंश्योरेंस कंपनी का पहले से अस्पताल से टाई-अप होता था। अगर इंश्योरेंस कंपनी का पहले से हॉस्पिटल से टाई-अप नहीं है, तो यह सुविधा उनको नहीं मिलती है। इलाज का बिल जेब से भरना होता है, जिसका सेटलमेंट क्लेम के जरिए बाद में करना होता है।
किन हॉस्पिटल्स में मिलेगी सुविधा?
अगर आपने किसी भी कंपनी की हेल्थ इंश्योरेंस ली है, तो 15 से ज्यादा बेड वाले देश के वो सभी अस्पताल जो अपनी स्टेट की हेल्थ अथॉरिटी से रजिस्टर्ड हैं। उनमें आप कैश-लेस इलाज का लाभ ले पाएंगे।
क्या यह सुविधा इमरजेंसी में मिलेगी
अगर आपके बीमा कंपनी का टाइ-अप आपके इलाज कराने वाले अस्पताल से नहीं है, तो इलेक्टिव सर्जरी या इलाज शुरू होने के 48 घंटे पहले बीमा कंपनी को बताना होगा। इमरजेंसी की स्थिति में भी बीमा कंपनी को 48 घंटे के भीतर जानकारी देनी होगी तभी आप इस सुविधा का लाभ ले सकेंगे।
सभी पॉलिसी होल्डर्स को मिलेगी यह सुविधा नहीं लगेगा एक्स्ट्रा चार्ज
यह सुविधा मौजूदा पॉलिसी होल्डर सहित आज के बाद पॉलिसी लेने वाले लोगों को भी मिलेगी। इसके लिए प्रीमियम में या अलग से कोई अतिरिक्त चार्ज नहीं देना होगा।
अभी केवल 67% बीमा धारक ही ले रहे लाभ
GI काउंसिल के हेल्थ इंश्योरेंस के डायरेक्टर सेगर संपतकुमार ने बताया कि आज से इंश्योरेंस कंपनियां अस्पतालों में यह सुविधा देने के लिए काम शुरू करेंगी। अभी करीब 63% लोग टाइअप अस्पतालों में कैशलेस सुविधा का लाभ ले रहे हैं। लेकिन 37% लोग अब भी इस सुविधा से वंचित है।