सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्कआईटीडीसी इंडिया ईप्रेस / आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल: ग्लोबल रेटिंग एजेंसी फिच (Fitch) ने वित्त वर्ष 2025 के लिए भारत का इकोनॉमिक ग्रोथ अनुमान 6.5% से बढ़ाकर 7% कर दिया है। फिच ने कहा कि भारत की आर्थिक ग्रोथ को मजबूत घरेलू मांग और निवेश में बढ़ोतरी से सपोर्ट मिलेगा।

रेटिंग एजेंसी ने 2024 के अंत तक रिटेल महंगाई गिरकर 4% तक आने का भी अनुमान लगाया है। फिच को उम्मीद है कि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) जुलाई से दिसंबर के बीच रेपो रेट में 0.5% की कटौती कर सकता है।

फिच के फोरकास्ट में यह बदलाव लगभग दो हफ्ते बाद आया है जब नेशनल स्टैटिकल ऑफिस (NSO) के ऑफिशियल आंकड़ों से पता चला है कि अक्टूबर-दिसंबर की अवधि में देश की GDP में 8.4% की वृद्धि हुई है। जो मैन्युफैक्चरिंग और माइनिंग सेक्टर के बेहतर परफॉर्मेंस से बढ़ी है।

अक्टूबर-दिसंबर तिमाही में मैन्युफैक्चरिंग ग्रोथ बढ़कर 11.6% हुई

माइनिंग ग्रोथ सालाना आधार पर -1.4% से बढ़कर 7.5% हो गई।

मैन्युफैक्चरिंग ग्रोथ सालाना आधार पर -4.8% से 11.6% हो गई।

कंस्ट्रक्शन ग्रोथ सालाना आधार पर बिना किसी बदलाव के 9.5% रही।

चीन की आर्थिक ग्रोथ अनुमान में कटौती

रेटिंग एजेंसी ने ताजा रिपोर्ट ने चीन की आर्थिक ग्रोथ अनुमान में कटौती की है। इसमें अनुमान को 4.6% से घटाकर 4.5% कर दिया है। इसकी वजह प्रॉपर्टी सेक्टर की दिक्कतें और कीमतों में लगातार गिरावट है। ग्लोबल GDP ग्रोथ आउटलुक को 0.3% बढ़ाकर 2.4% कर दिया है। अमेरिकी इकोनॉमिक अनुमान बढ़ाकर 2.1% कर दिया है, जोकि पहले 1.2% का अनुमान लगाया था।

GDP क्या है?

GDP इकोनॉमी की हेल्थ को ट्रैक करने के लिए उपयोग किए जाने वाले सबसे कॉमन इंडिकेटर्स में से एक है। GDP देश के भीतर एक स्पेसिफिक टाइम पीरियड में प्रोड्यूस सभी गुड्स और सर्विस की वैल्यू को रिप्रजेंट करती है। इसमें देश की सीमा के अंदर रहकर जो विदेशी कंपनियां प्रोडक्शन करती हैं उन्हें भी शामिल किया जाता है।

दो तरह की होती है GDP

GDP दो तरह की होती है। रियल GDP और नॉमिनल GDP। रियल GDP में गुड्स और सर्विस की वैल्यू का कैलकुलेशन बेस ईयर की वैल्यू या स्टेबल प्राइस पर किया जाता है। फिलहाल GDP को कैलकुलेट करने के लिए बेस ईयर 2011-12 है। वहीं नॉमिनल GDP का कैलकुलेशन करंट प्राइस पर किया जाता है।

कैसे कैलकुलेट की जाती है GDP?

GDP को कैलकुलेट करने के लिए एक फॉर्मूले का इस्तेमाल किया जाता है। GDP=C+G+I+NX, यहां C का मतलब है प्राइवेट कंजम्प्शन, G का मतलब गवर्नमेंट स्पेंडिंग, I का मतलब इन्वेस्टमेंट और NX का मतलब नेट एक्सपोर्ट है।

GDP की घट-बढ़ के लिए जिम्मेदार कौन है?

GDP को घटाने या बढ़ाने के लिए चार इम्पॉर्टेंट इंजन होते हैं। पहला है, आप और हम। आप जितना खर्च करते हैं, वो हमारी इकोनॉमी में योगदान देता है। दूसरा है, प्राइवेट सेक्टर की बिजनेस ग्रोथ। ये GDP में 32% योगदान देती है। तीसरा है, सरकारी खर्च।

इसका मतलब है गुड्स और सर्विसेस प्रोड्यूस करने में सरकार कितना खर्च कर रही है। इसका GDP में 11% योगदान है। और चौथा है, नेट डिमांड। इसके लिए भारत के कुल एक्सपोर्ट को कुल इम्पोर्ट से घटाया जाता है, क्योंकि भारत में एक्सपोर्ट के मुकाबले इम्पोर्ट ज्यादा है, इसलिए इसका इम्पैक्ट GPD पर निगेटिव ही पड़ता है।