सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में विस्तार की दिशा में इवॉल्व ने वर्ष 2030 तक तीन गीगावाट की नवीकरणीय ऊर्जा परिसंपत्ति क्षमता का लक्ष्य रखा है। कंपनी की इस योजना का उद्देश्य सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, हाइब्रिड परियोजनाओं और ऊर्जा भंडारण के क्षेत्र में अपनी उपस्थिति बढ़ाना है। इस रणनीतिक पहल को ‘आरटी3—रोड टू 3 गीगावाट’ नाम दिया गया है।

सौर और पवन ऊर्जा पर रहेगा जोर कंपनी की योजना केवल ऊर्जा परियोजनाओं के निर्माण तक सीमित नहीं है। इसके तहत नई परियोजनाओं का विकास करने, मौजूदा परिसंपत्तियों का अधिग्रहण करने, निवेश बढ़ाने और ऊर्जा संयंत्रों के स्वामित्व एवं संचालन पर ध्यान दिया जाएगा। सौर ऊर्जा के साथ पवन ऊर्जा और दोनों स्रोतों पर आधारित हाइब्रिड परियोजनाएं भी इस विस्तार योजना का हिस्सा होंगी।

ऊर्जा भंडारण प्रणालियों को शामिल करने का उद्देश्य बिजली की उपलब्धता और आपूर्ति प्रबंधन को बेहतर बनाने में मदद करना है। नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन में मौसम और समय के कारण होने वाले उतार-चढ़ाव को देखते हुए भंडारण तकनीक का महत्व बढ़ रहा है। निवेश और साझेदारी से विस्तार की तैयारी तीन गीगावाट के लक्ष्य को हासिल करने के लिए कंपनी पूंजी जुटाने, रणनीतिक साझेदारियां विकसित करने और परियोजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करने की योजना पर काम कर रही है। इसके लिए परियोजना विकासकर्ताओं, निवेशकों, वित्तीय संस्थानों, तकनीकी भागीदारों और ऊर्जा खरीदने वाली कंपनियों के साथ सहयोग के अवसर तलाशे जा रहे हैं। कंपनी की रणनीति में परियोजनाओं के विकास से लेकर निर्माण, संचालन और परिसंपत्ति प्रबंधन तक की क्षमताओं को मजबूत करना शामिल है।

स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र में बढ़ती संभावनाएं भारत में स्वच्छ ऊर्जा की मांग और नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता बढ़ाने के प्रयासों के बीच कंपनियां अपने निवेश और परियोजना पोर्टफोलियो का विस्तार कर रही हैं। इवॉल्व का घोषित लक्ष्य इसी क्षेत्र में बड़े स्तर पर अपनी भागीदारी बढ़ाने की योजना को दर्शाता है।हालांकि, निर्धारित समयसीमा तक तीन गीगावाट का लक्ष्य हासिल करना परियोजनाओं की उपलब्धता, वित्तपोषण, नियामकीय मंजूरियों और निर्माण की गति पर निर्भर करेगा।


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