सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : भोपाल स्मारक अस्पताल एवं अनुसंधान केंद्र (बीएमएचआरसी), भोपाल में जैव-चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अनुसंधान में नैतिक पहलू विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई। इस कार्यक्रम का उद्देश्य शोधकर्ताओं को एथिकल मानकों के महत्व से अवगत कराना और उन्हें सुरक्षित, जिम्मेदार एवं पारदर्शी शोध प्रथाओं के प्रति जागरूक करना था। कार्यशाला में देश के 33 संस्थानों से 151 शोधकर्ताओं ने भाग लिया, जिनमें एथिकल कमेटी के 38 सदस्य भी शामिल थे। मुख्य अतिथि, आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) की बायोएथिक्स यूनिट की प्रमुख रोली माथुर ने उद्घाटन सत्र में कहा कि एथिक्स कमेटी शोधकर्ताओं के लिए बाधा नहीं, बल्कि सुरक्षा कवच की तरह काम करती है। उन्होंने बताया कि यदि शोधकर्ता प्रारंभ से ही एथिकल गाइडलाइंस को अनुसंधान में शामिल करें, तो स्वीकृति प्रक्रिया सुगम हो जाती है और शोध की गुणवत्ता बढ़ती है। बीएमएचआरसी की प्रभारी निदेशक मनीषा श्रीवास्तव ने कहा कि बायोमेडिकल रिसर्च में एथिक्स अनिवार्य है और इसके पालन से गंभीर परिणामों से बचा जा सकता है। धर्मेश कुमार लाल (आईसीएमआर) ने शोधकर्ताओं को प्रशिक्षण और मार्गदर्शन प्रदान करने पर जोर दिया, ताकि प्रोजेक्ट प्रस्ताव से लेकर क्रियान्वयन तक सभी एथिकल नियमों का सही पालन हो सके। कार्यशाला में प्रतिभागियों को सहमति प्रक्रिया, प्रतिभागियों की सुरक्षा, सरकारी नियमों और एथिक्स कमेटी की भूमिका के बारे में जानकारी दी गई। बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर वर्गों जैसे संवेदनशील समूहों के लिए विशेष सावधानी बरतने पर भी जोर दिया गया। रोली माथुर ने यह भी बताया कि भारत एथिक्स के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर अग्रणी है। एथिक्स कमेटियों में लगभग 50 प्रतिशत सदस्य बाहरी संस्थानों से होते हैं और आम नागरिकों को भी शामिल किया जाता है, जिससे निष्पक्षता और स्वतंत्र निर्णय सुनिश्चित होता है। कार्यशाला ने शोधकर्ताओं में पारदर्शी और जिम्मेदार शोध प्रणाली को बढ़ावा देने का उद्देश्य पूरा किया।
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