कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सवाल किया कि पश्चिम एशिया संकट के मद्देनजर आयोजित होने वाले समिट को आगे क्यों नहीं बढ़ाया जा रहा है। पार्टी ने इस विषय को लेकर सरकार की नीतियों पर सवाल खड़े किए और इसे गंभीर अंतरराष्ट्रीय मुद्दे के प्रति अनदेखी बताया।

कांग्रेस के नेताओं का कहना है कि वैश्विक तनाव और संकट के समय में समिट जैसे मंचों का आयोजन अधिक महत्वपूर्ण हो जाता है। इससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की भूमिका और दायित्व को मजबूत किया जा सकता है। वहीं, समय पर समिट का आयोजन न होना संभावित रूप से भारत की कूटनीतिक सक्रियता पर असर डाल सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि कांग्रेस की यह प्रतिक्रिया राजनीतिक रणनीति के साथ-साथ वैश्विक कूटनीति पर सरकार की जवाबदेही को भी उजागर करती है। विपक्ष इस बात पर जोर दे रहा है कि संकट के समय में भारत को सक्रिय और तेज़ निर्णय लेने की आवश्यकता है।

प्रधानमंत्री कार्यालय ने अभी तक इस पर विस्तृत प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन यह मुद्दा आगामी दिनों में राजनीतिक बहस का केंद्र बन सकता है।

कुल मिलाकर, कांग्रेस द्वारा पीएम से पूछे गए सवाल ने पश्चिम एशिया संकट और भारत की कूटनीतिक सक्रियता पर नया ध्यान खींचा है। राजनीतिक और वैश्विक विश्लेषकों का मानना है कि इस मुद्दे पर सार्वजनिक और अंतरराष्ट्रीय दृष्टिकोण से प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण साबित होगी।

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