सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : भोपाल मेमोरियल अस्पताल एवं अनुसंधान केंद्र (बीएमएचआरसी) के न्यूरो सर्जरी विभाग ने सिर और गर्दन के जंक्शन पर स्थित अत्यंत संवेदनशील क्षेत्र, क्रेनियोवर्टिब्रल (सीवी) जंक्शन की दो गंभीर और दुर्लभ स्थितियों के उपचार हेतु सफल सर्जरी कर मरीजों को नया जीवन प्रदान किया है। दोनों सर्जरी न्यूरो सर्जरी विभागाध्यक्ष डॉ संदीप सोरते, एसोसिएट प्रोफेसर डॉ सौरभ दीक्षित और असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ सौरभ गुप्ता ने कीं। एनेस्थीसिया विभाग से प्रोफेसर डॉ सैफुल्लाह टीपू और एसोसिएट प्रोफेसर डॉ कनिका सुहाग ने सर्जरी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। मरीजों का इलाज आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत किया गया। सर्जरी करने वाली टीम में न्यूरो सर्जरी विभाग के रेजिडेंट डॉक्टर डॉ संजय शर्मा, डॉ राजीव मिंज, डॉ आवेस खान और डॉ सत्यम जैन शामिल थे।

सीवी जंक्शन में मौजूद स्पाइनल ट्यूमर की जटिल सर्जरी सफल
बीएमएचआरसी में 39 वर्षीय पुरुष में सीवी जंक्शन क्षेत्र में बने एक दुर्लभ प्रकार के स्पाइनल ट्यूमर का उपचार किया गया। इस ट्यूमर के दबाव के कारण मरीज के दाएँ हाथ और पैर में लगातार कमजोरी आ रही थी और चलने–फिरने में कठिनाई के साथ लकवे जैसी स्थिति बनने लगी थी। जाँच में पाया गया कि ट्यूमर सी–1 हड्डी के पास स्थित था, जो गर्दन की सबसे ऊपरी और अत्यंत संवेदनशील हड्डी है तथा सीधे ब्रेन स्टेम के नीचे स्थित रहती है। इस क्षेत्र में ज़रा-सी भी गड़बड़ी सांस, संतुलन, चलने–फिरने और शरीर की कई स्वचालित क्रियाओं को प्रभावित कर सकती है।
सर्जरी टीम ने एक उन्नत प्रक्रिया द्वारा रीढ़ की हड्डी के ऊपरी छोटे हिस्से को हटाकर ट्यूमर तक सुरक्षित पहुँच बनाई और उसे सावधानीपूर्वक निकालकर नसों पर पड़े दबाव को दूर किया। यह सर्जरी अत्यंत जटिल मानी जाती है, क्योंकि इस क्षेत्र में मौजूद नसें और संरचनाएँ बहुत ही नाजुक होती हैं। चिकित्सा साहित्य के अनुसार, इस प्रकार के ट्यूमर प्रति एक लाख आबादी में केवल कुछ ही मामलों में देखने को मिलते हैं। जन्मजात संरचनात्मक असमानताएँ, हड्डी या नस के ऊतकों की कोशिकाओं का असामान्य बढ़ना या लंबे समय तक संक्रमण बने रहना इन ट्यूमर के प्रमुख कारण माने जाते हैं। सर्जरी के बाद मरीज की स्थिति में सुधार है।

सीवी जंक्शन अनियमितता से पीड़ित 17 वर्षीय युवक को नया जीवन
दूसरे मामले में सीवी जंक्शन में अनियमितता से पीड़ित 17 वर्षीय युवक की सफल सर्जरी की गई। जन्म से ही इस युवक के सिर और गर्दन के जंक्शन पर स्थित हड्डियाँ असामान्य रूप से विकसित हो गई थीं। इन हड्डियों की वजह से युवक की रीढ़ की हड्डी पर दबाव बढ़ रहा था। कुछ दिन पहले गिरने से चोट लगने पर उसकी स्थिति गंभीर हो गई। उसके चारों अंगों में तेजी से कमजोरी आने लगी और वह चलने–फिरने में पूरी तरह असमर्थ हो गया। यहां तक कि वह बिस्तर से उठ–बैठ भी नहीं पा रहा था। अगर जल्दी उपचार नहीं होता, तो वह स्थायी रूप से लकवे का शिकार हो सकता था।
मामले की गंभीरता को देखते हुए डॉक्टरों ने सर्जरी करने का निर्णय लिया। इस प्रक्रिया में सिर के पीछे की हड्डी को गर्दन की ऊपरी हड्डी से विशेष स्क्रू और रॉड प्रणाली के माध्यम से स्थिर किया गया, जिससे नसों पर दबाव कम हुआ और जंक्शन स्थिर हो पाया। यह सर्जरी भी अत्यंत चुनौतीपूर्ण होती है क्योंकि सीवी जंक्शन दिमाग और रीढ़ की हड्डी के संधि–स्थल पर स्थित है तथा पूरे शरीर की कई महत्वपूर्ण क्रियाएँ इसी क्षेत्र से नियंत्रित होती हैं। बीएमएचआरसी की टीम द्वारा सर्जरी सफलतापूर्वक पूरी की गई। मरीज अब सहारे से उठ–बैठ पा रहा है। फिजियोथेरेपी के साथ उसकी स्थिति में लगातार सुधार की उम्मीद है।

इस अवसर पर बीएमएचआरसी की प्रभारी निदेशक, डॉ मनीषा श्रीवास्तव ने कहा कि क्रेनियोवर्टिब्रल जंक्शन से संबंधित सर्जरी अत्यंत संवेदनशील होती हैं और अत्यधिक कुशल सर्जन ही ऑपरेशन कर पाते हैं। ऐसे में ये दोनों सर्जरी हमारी टीम की उत्कृष्टता को प्रदर्शित करती हैं। हम भविष्य में भी उच्च तकनीकी सुविधाओं और सक्षम विशेषज्ञों के माध्यम से मरीजों को सर्वोत्तम उपचार प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

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