सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्कआईटीडीसी इंडिया ईप्रेस / आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने गुरुवार 1 फरवरी को अपने अंतरिम बजट भाषण में कहा- ‘सरकार देश को 4 जाति में बांटकर देखती है, महिला, किसान, युवा और गरीब।’ तो क्या बजट में इन्हें लेकर बड़ी घोषणाएं हुईं? जवाब है नहीं।

इस बार बजट में आम जनता के लिए न ही कुछ सस्ता-महंगा हुआ, न टैक्स के स्लैब में कोई बदलाव हुआ और न ही इस बार कोई बड़ी योजना की घोषणा हुई। हां ये जरूर है कि कुछ योजनाओं का दायरा बढ़ाया गया है।

ये बजट लोकसभा चुनाव से पहले पेश किया गया, लेकिन 2019 के अंतरिम बजट की तरह इस बजट में कोई भी लोकलुभावन घोषणाएं नहीं हुईं। सरकार का सीधा फोकस इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट पर दिखा। वित्त मंत्री जुलाई बजट में विकसित भारत का डिटेल्ड रोडमैप पेश करेंगी।

तो इस स्टोरी में अंतरिम बजट का एनालिसिस… लेकिन उससे पहले ये ग्राफिक्स देखें कि किस विभाग को कितना बजट मिला।

  1. टैक्स स्लैब में बदलाव नहीं, लेकिन पेंडिंग डायरेक्ट टैक्स के मामलों में टैक्स माफ

सरकार ने इस बार इनकम टैक्स में कोई राहत नहीं दी है। पुरानी टैक्स रिजीम चुनने पर अभी भी आपकी 2.5 लाख रुपए तक की इनकम ही टैक्स फ्री रहेगी। हालांकि, इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 87A के तहत आप 5 लाख तक की इनकम पर टैक्स बचा सकते हैं।

नई टैक्स रिजीम चुनने पर पहले की तरह ही 3 लाख रुपए तक की इनकम पर टैक्स नहीं देना होगा। इसमें इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 87A के तहत सैलरीड पर्सन 7.5 लाख रुपए तक की इनकम पर और अन्य 7 लाख तक की इनकम पर टैक्स छूट पा सकते हैं।

वहीं, 1962 से वित्त वर्ष 2009-10 तक के पेंडिंग डायरेक्ट टैक्स के मामलों में टैक्स माफ कर दिया जाएगा। हालांकि, ये तभी होगा जब आप पर 25,000 रुपए तक का टैक्स बन रहा हो। इसी तरह 2010-11 से 2014-15 के बीच पेंडिंग मामलों में इनकम टैक्स से जुड़े 10 हजार रुपए तक के मामलों को वापस लेने का फैसला किया है। इससे एक करोड़ लोगों को फायदा होगा।

असर: उन लोगों को निराशा हुई है जो टैक्स स्लैब में बदलाव की उम्मीद कर रहे थे। हालांकि, सरकार ने स्टार्टअप के लिए टैक्स छूट को मार्च 2025 तक बढ़ा दिया गया है, जिसका उन्हें फायदा मिलेगा। टैक्स मामलों को वापस लेने से 1 करोड़ लोगों को फायदा होगा।