सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क – आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस / आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : एम्स भोपाल ने मध्य प्रदेश में मौखिक स्वास्थ्य पर एक ऐतिहासिक और व्यापक सर्वेक्षण पूरा किया है, जिसने प्रदेश में दांत और मुंह की बीमारियों की वास्तविक स्थिति को उजागर किया है। इसके निष्कर्ष विश्व स्वास्थ्य संगठन के साउथ-ईस्ट एशिया जर्नल ऑफ पब्लिक हेल्थ में प्रकाशित हुए हैं। मध्य प्रदेश, जिसकी आबादी 7.5 करोड़ से अधिक है, लंबे समय से गंभीर मौखिक स्वास्थ्य चुनौतियों का सामना कर रहा था। पिछला बड़ा सर्वेक्षण 2002–03 में हुआ था। इस कमी को दूर करने के लिए एम्स भोपाल के दंत विभाग और रीजनल ट्रेनिंग सेंटर फॉर ओरल हेल्थ प्रमोशन एंड डेंटल पब्लिक हेल्थ की टीम ने, स्वास्थ्य सेवाएँ संचालनालय, मध्य प्रदेश शासन के सहयोग से यह अध्ययन किया।
सर्वेक्षण में 41 जिलों से लगभग 48,000 लोगों को शामिल किया गया, जिसमें बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी आयु वर्गों की जांच हुई। परिणामों से पता चला कि 40–70% लोग दांतों की सड़न, 50–87% मसूड़ों की बीमारी और 2–17% लोग मुंह के कैंसर से पहले की अवस्थाओं से प्रभावित हैं। विशेष रूप से, 70% से अधिक बुजुर्ग और लगभग आधे छोटे बच्चे कैविटी से पीड़ित पाए गए।
एम्स भोपाल ने इस सर्वेक्षण के आधार पर भारत का पहला मौखिक स्वास्थ्य डेटा बैंक तैयार किया है, जो विश्व स्वास्थ्य संगठन मॉडल पर आधारित है। इससे जिलेवार मौखिक स्वास्थ्य सेवाओं की सटीक जानकारी उपलब्ध होगी और सरकार को प्रभावी स्वास्थ्य योजनाएँ बनाने में मदद मिलेगी। सर्वेक्षण की सटीकता सुनिश्चित करने के लिए मोबाइल ऐप और जीपीएस तकनीक का उपयोग किया गया।
एम्स भोपाल के रीजनल ट्रेनिंग सेंटर के माध्यम से डॉक्टरों, शिक्षकों और काउंसलरों को प्रशिक्षण देकर मौखिक स्वास्थ्य सेवाओं को जनसामान्य तक पहुँचाने का प्रयास भी किया जा रहा है। यह पहल न केवल बीमारियों की रोकथाम में सहायक होगी बल्कि राज्य के स्वास्थ्य परिदृश्य को भी नई दिशा देगी।

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