सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस / आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान भोपाल ने एक और चिकित्सकीय उपलब्धि हासिल की है। संस्थान ने मध्य भारत में पहली बार “वॉल्व-इन-वॉल्व ट्रांसकैथेटर एओर्टिक वॉल्व इम्प्लांटेशन प्रक्रिया को सफलतापूर्वक अंजाम दिया है। यह प्रक्रिया 72 वर्षीय एक पुरुष मरीज पर की गई, जिसे पहले से एक कृत्रिम एओर्टिक वॉल्व प्रत्यारोपित किया गया था, लेकिन समय के साथ वह वॉल्व खराब हो गया था।
टीएवीआई तकनीक का उपयोग करते हुए, डॉक्टरों की विशेषज्ञ टीम ने पुराने वॉल्व के भीतर एक नया वॉल्व स्थापित किया। यह प्रक्रिया बिना किसी ओपन हार्ट सर्जरी के, कैथेटर के माध्यम से की गई, जिससे मरीज को जल्दी स्वस्थ होने में सहायता मिली। इस तकनीक से उच्च जोखिम वाले हृदय रोगियों के लिए जीवनदायिनी समाधान उपलब्ध होता है।
एम्स भोपाल के निदेशक अजीत सिंह ने बताया कि यह उपलब्धि संस्थान की तकनीकी दक्षता और विशेषज्ञ डॉक्टरों की मेहनत का प्रमाण है। कार्डियोलॉजी विभाग की टीम ने प्रक्रिया को सुरक्षित रूप से पूर्ण किया और मरीज अब स्वस्थ है तथा रिकवरी के दौर में है।
इस महत्वपूर्ण सफलता से न केवल एम्स भोपाल की प्रतिष्ठा बढ़ी है, बल्कि मध्य भारत के हृदय रोगियों को अत्याधुनिक इलाज की सुविधा भी मिली है। यह प्रक्रिया क्षेत्र के स्वास्थ्य सेवा मानकों को एक नई ऊंचाई तक ले जाएगी।
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