आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस/आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल: सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड स्कीम (SGBs) 2023-24 की दूसरी सीरीज सोमवार यानी 11 सितंबर से खुल रही है। इसमें 15 सितंबर तक निवेश कर सकते हैं। इस बार के लिए सोने की कीमत 5,923 रुपए प्रति 1 ग्राम तय की है। इसमें ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरह से निवेश किया जा सकता है।

ऑनलाइन अप्लाय करने पर 50 रुपए की छूट मिलती है, यानी आपको ये 5,873 रुपए प्रति ग्राम का पड़ेगा। सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड में आप 24 कैरेट यानी 99.9% शुद्ध सोने में निवेश करते हैं। यहां हम आपको सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड के बारे में बता रहे हैं ताकि आप भी इसमें निवेश करके फायदा कमा सकें…

क्या है सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड?

सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड एक सरकारी बॉन्ड होता है। इसे डीमैट के रूप में परिवर्तित कराया जा सकता है। यदि बॉन्ड पांच ग्राम सोने का है, तो पांच ग्राम सोने की जितनी कीमत होगी, उतनी ही बॉन्ड की कीमत होगी। इसे RBI की तरफ से जारी किया जाता है।

24 कैरेट यानी 99.9% शुद्ध सोने में निवेश

सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड में आप 24 कैरेट यानी 99.9% शुद्ध सोने में निवेश करते हैं। SGBs में निवेश पर 2.50% का सालाना ब्याज मिलता है। पैसों की जरूरत पड़ने पर बॉन्ड के बदले लोन भी लिया जा सकता है।

भारतीय बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन लिमिटेड यानी IBJA के पब्लिश्ड रेट के आधार पर बॉन्ड की कीमत तय होती है। इसमें सब्सक्रिप्शन पीरियड से पहले वाले हफ्ते के आखिरी तीन दिनों के रेट का एवरेज निकाला जाता है।

शुद्धता और सुरक्षा की कोई चिंता नहीं

SGBs में शुद्धता की चिंता करने की कोई जरूरत नहीं होती है। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के मुताबिक गोल्ड बॉन्ड की कीमत इंडियन बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) द्वारा प्रकाशित 24 कैरेट शुद्धता वाले सोने की कीमत से लिंक होती है। इसके साथ ही इसे डीमैट के रूप में रखा जा सकता है, जो काफी सुरक्षित है और उस पर कोई खर्च भी नहीं होता है।

अधिकतम 4 किलो सोने में कर सकते हैं निवेश

SGBs के जरिए कोई शख्स एक वित्त वर्ष में कम से कम 1 ग्राम और अधिकतम 4 किलोग्राम सोने में निवेश कर सकता है। जॉइंट होल्डिंग के मामले में 4 किलोग्राम की निवेश सीमा पहले आवेदक पर ही लागू होगी। वहीं किसी ट्रस्ट के लिए खरीद की अधिकतम सीमा 20 किलो है।

8 साल से पहले बॉन्ड बेचने पर देना होता है टैक्स

सॉवरेन का मैच्योरिटी पीरियड 8 साल रहता है। मैच्योरिटी पीरियड पूरा होने के बाद इससे होने वाले लाभ पर कोई टैक्स नहीं लगता। वहीं अगर आप 5 साल बाद अपना पैसा निकालते हैं, तो इससे होने वाले लाभ पर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG) के रूप में 20.80% टैक्स लगता है।