सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क्स / आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस / आईटीडीसी न्यूज़ /एजेंसियाँ/ भोपाल: 29 करोड़ की योजना पर 103 करोड़ खर्च, फिर भी खेतों तक नहीं पहुंचा पानी
कैग की रिपोर्ट में सिंचाई से जुड़ी एक योजना के क्रियान्वयन पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, 29 करोड़ रुपये की लागत वाली योजना पर 103 करोड़ रुपये खर्च किए जाने के बावजूद किसानों को इसका अपेक्षित लाभ नहीं मिल पाया। भारी खर्च के बाद भी खेतों तक पानी नहीं पहुंचने से योजना के उद्देश्य और सरकारी धन के इस्तेमाल पर सवाल खड़े हो रहे हैं। योजना का मकसद किसानों को सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराना और खेती के लिए पानी की उपलब्धता बढ़ाना था। इसके माध्यम से कृषि उत्पादन में सुधार और किसानों को सिंचाई के लिए बेहतर व्यवस्था देने की अपेक्षा की गई थी। लेकिन रिपोर्ट में सामने आए खर्च और लाभ की स्थिति के बीच अंतर ने परियोजना के क्रियान्वयन पर ध्यान आकर्षित किया है।
कैग यानी भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की रिपोर्ट सरकारी योजनाओं में खर्च, प्रक्रियाओं और कार्यों के निष्पादन की जांच के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है। इस मामले में स्वीकृत लागत की तुलना में कई गुना अधिक राशि खर्च होने के बावजूद किसानों को लाभ नहीं मिलने का मुद्दा वित्तीय प्रबंधन और जवाबदेही से जुड़ा है। इस स्थिति में योजना पर हुए खर्च, कार्यों की वास्तविक प्रगति और सिंचाई सुविधाएं उपलब्ध कराने में आई बाधाओं की समीक्षा आवश्यक है। साथ ही, यह स्पष्ट करना भी जरूरी होगा कि अतिरिक्त खर्च किन कारणों से हुआ और निर्धारित लक्ष्य क्यों हासिल नहीं किए जा सके। फिलहाल, योजना का नाम, संबंधित क्षेत्र और कैग रिपोर्ट में दर्ज विस्तृत निष्कर्षों की पुष्टि आवश्यक है। इन तथ्यों के सामने आने के बाद जिम्मेदारी और आगे की कार्रवाई को लेकर स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकेगी।
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