आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस/आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : 1 अक्टूबर से इंटरनेशनल क्रेडिट या डेबिट कार्ड का विदेश में इस्तेमाल करना महंगा होने वाला है। इस पर 20% टैक्स कलेक्शन एट सोर्स यानी TCS लगेगा। इस बार के बजट में TCS को 5% से बढ़ाकर 20% किया गया था। अब इंटरनेशनल क्रेडिट कार्ड का भारत से बाहर इस्तेमाल लिब्रलाइज्ड रेमिटेंस स्कीम यानी LRS के तहत आ गया है।
7 लाख से ज्यादा खर्च पर लगेगा TCS
एक वित्तीय वर्ष में इंटरनेशनल डेबिट और क्रेडिट कार्ड से 7 लाख रुपए तक खर्च करने पर 20% TCS नहीं लगेगा। लेकिन यदि कोई विदेश यात्रा पर एक वित्त वर्ष में 8 लाख रुपए का कार्ड पेमेंट करता है तो उसे पूरी रकम पर 20% यानी 1.6 लाख रुपए TDS चुकाना होगा। 7 लाख से 1 रुपए भी ज्यादा खर्च होने की स्थिति में पूरी रकम TCS के दायरे में आएगी।
आप परिवार के साथ दुबई जा रहे हैं। इस ट्रिप में 10 लाख रुपए के पेमेंट कार्ड से कर दिए। इस पर 2 लाख रुपए का TCS चुकाना होगा। इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ेगा कि सारे पेमेंट क्रेडिट कार्ड से किए गए या डेबिट कार्ड से। TCS आप खुद नहीं, बल्कि कार्ड जारी करने वाला बैंक जमा करेगा और बिल में जोड़ेगा। इस नई टैक्स दर का असर टूर पैकेज और नॉन रेसिडेंट्स इंडियंस को भेजे जाने वाले गिफ्ट पर भी होगा।
एजुकेशन और मेडिकल टैक्स दायरे से बाहर रखा गया
TCS की ये नई दरें विदेश में एजुकेशन और इलाज (मेडिकल) पर किए गए खर्च पर लागू नहीं होगी। मेडिकल खर्च में मेडिकल ट्रीटमेंट और दूसरे दैनिक खर्च शामिल हैं। साथ ही मेडिकल ट्रेवल के लिए खरीदी गईं टिकट को भी छूट दी गई है। इसी तरह एजुकेशनल में विदेश में पढ़ाई करने वाले व्यक्ति के लिए खरीदी गईं टिकट, ट्यूशन और दूसरी फीस के साथ-साथ दैनिक खर्चों के लिए भेजा गया पैसा शामिल है।
फैसले को लेकर तीन तरह की आशंकाएं
अमीर लोग विदेशों में ऑनलाइन ट्रांजैक्शन करने से बचेंगे
कैश में विदेशी करंसी खरीदने के लिए मजबूर होंगे
कुछ लोग हवाला नेटवर्क भी इस्तेमाल कर सकते हैं
कुछ एक्सपर्ट फैसले के फायदे भी गिना रहे
सीए अभय शर्मा ने कहा कि इससे सरकार के पास विदेश में खर्च की रियल टाइम जानकारी मिलेगी। पर्यटकों को भी फॉरेक्स कार्ड बनाने जैसी अतिरिक्त झंझट से मुक्ति मिल जाएगी। हालांकि इससे अतिरिक्त खर्च होगा, लेकिन उसका क्लेम भी मिल जाएगा।
क्या है TCS?
TCS यानी टैक्स कलेक्शन ऐट सोर्स होता है। इसका मतलब स्रोत पर एकत्रित टैक्स होता है। TCS का भुगतान सेलर, डीलर, वेंडर, दुकानदार की तरफ से किया जाता है। हालांकि, वह कोई भी सामान बेचते हुए खरीदार या ग्राहक से वो वसूलता है। वसूलने के बाद इसे जमा करने का काम सेलर या दुकानदार का ही होता है। इनकम टैक्स एक्ट की धारा 206C में इसे कंट्रोल किया जाता है। इस तरह का टैक्स तभी काटा जाता है जब पेमेंट एक सीमा से ज्यादा होता है।