आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस/आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : चीन से इंपोर्ट होने वाली स्टील पर भारत ने ‘एंटी-डंपिंग ड्यूटी’ लगा दी है। डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ ट्रेड रेमेडीज (DGTR) ने सरकार से चीनी स्टील व्हील्स पर 613 डॉलर (करीब 50,867 रुपए) प्रति टन लगाने की सिफारिश की थी। वित्त मंत्रालय ने सोमवार को एक नोटिफिकेशन के जरिए इस बात की जानकारी दी है। सरकार के इस फैसले से डोमेस्टिक कंपनियों के नुकसान की आशंका कम हो जाएगी। इसके पहले 13 दिसंबर 2018 को चीन के इन प्रोडक्ट्स पर भारत ने 5 साल के लिए यह ड्यूटी लगाई थी, जिसे अगले 5 सालों के लिए बढ़ा दिया गया है।

मार्केट से कम कीमत पर भारत को स्टील बेच रहा था चीन

एंटी-डंपिंग शुल्क लगाने के इस फैसले पर वित्त मंत्रालय ने कहा कि चीन काफी समय से डंपिंग प्राइस यानी लागत से कम कीमतों पर भारत को स्टील बेचता रहा है। इसी महीने 4 सितंबर को स्टील सेक्रेटरी नरेन्द्र नाथ सिंह ने कहा था कि भारत चीन के स्टील डंपिंग की निगरानी काफी समय के कर रहा था।

भारत का दूसरा सबसे बड़ा स्टील एक्सपोर्टर है चीन

अप्रैल-जुलाई क्वार्टर के दौरान साउथ कोरिया के बाद चीन भारत का दूसरा सबसे बड़ा स्टील एक्सपोर्टर रहा है। चीन ने इस दौरान 6 लाख टन स्टील भारत को बेचा है। यह आंकड़ा पिछले साल के मुकाबले 62% ज्यादा है। इस दौरान भारत ने चीन से 20 लाख टन फिनिश्ड स्टील इंपोर्ट किया है। यह 2020 से बाद सबसे ज्यादा और पिछले साल के मुकाबले 23% ज्यादा है।

डंपिंग क्या होती है?

डंपिंग का मतलब कूड़ा फेंकना होता है। जब कोई देश किसी प्रोडक्ट को उस देश की डोमेस्टिक मार्केट से कम कीमतों पर बेचता है, तो इसे डंपिंग कहा जाता है। उदाहरण के लिए, अगर भारत में स्टील की कीमत 60,000 रुपए प्रति टन है; लेकिन और जरूरत के लिए चीन से स्टील इंपोर्ट किया जाता है, तो चीन इसे 30,000 रुपए प्रति टन की रेट में दे देता है। इस कंडीशन में कहा जाएगा कि चीन अपने स्टील को भारत में डंप कर रहा है। इसका सबसे बड़ा उदाहरण चीन की लाइट्स और खिलौने हैं।

डंपिंग के क्या नुकसान हैं।

डंपिंग से आपको विदेशी प्रोडक्ट्स सस्ते दामों पर मिल तो जाएंगे, लेकिन इससे आपकी घरेलू कंपनियां उस प्रोडक्ट को उसी कीमत पर नहीं बेच पाएंगी, क्योंकि उनकी लागत ज्यादा है। इससे उनके प्रोडक्ट्स की डिमांड कम हो जाएगी और कंपनियां बंद भी हो सकती हैं।