सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : भोपाल। ब्रह्मांड की सबसे ऊर्जावान वस्तुओं में गिने जाने वाले ब्लेज़ारों का अध्ययन कर रहे खगोलविदों को इनके एक्स-रे उत्सर्जन के स्रोतों को लेकर नए संकेत मिले हैं। इससे सक्रिय आकाशगंगाओं के आसपास मौजूद अत्यधिक भौतिक परिस्थितियों को समझने में मदद मिल सकती है।
ब्लेज़ार सक्रिय आकाशगंगाओं की शक्तिशाली श्रेणी हैं, जिनके केंद्र में अतिद्रव्यमान ब्लैक होल होते हैं। जब पदार्थ इन ब्लैक होल की ओर गिरता है, तो भारी मात्रा में ऊर्जा निकल सकती है। इसी दौरान सापेक्षिक कण जेट प्रकाश की गति के करीब वेग से बाहर निकलते हैं। जब ये जेट लगभग पृथ्वी की दिशा में होते हैं, तो ऐसी वस्तुएं असाधारण रूप से चमकदार दिखाई देती हैं।
TeV ब्लेज़ार कहलाने वाला एक विशेष ऊर्जावान समूह बहुत उच्च ऊर्जा वाली गामा किरणें पैदा करता है, जिनकी ऊर्जा टेरा-इलेक्ट्रॉन-वोल्ट स्तर तक पहुंचती है। इनके जेट लगभग पृथ्वी की ओर होने के कारण इनका एक्स-रे उत्सर्जन सामान्य तौर पर जेट से आने वाले विकिरण से प्रभावित रहता है। इससे ब्लैक होल के आसपास की अभिवृद्धि डिस्क सहित अन्य क्षेत्रों से आने वाले संकेतों को अलग पहचानना कठिन हो जाता है।
आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान शोध संस्थान (ARIES), नैनीताल के शोधकर्ताओं ने चार पारंपरिक TeV ब्लेज़ार – Mrk 421, Mrk 501, PG 1553+113 और PKS 2155-304 – का अध्ययन NASA के NICER और NuSTAR अंतरिक्ष दूरबीनों के अवलोकनों के आधार पर किया। ARIES के अनुसार, ब्लेज़ारों के मल्टी-वेवलेंथ फ्लक्स, ध्रुवीकरण और स्पेक्ट्रल वेरिएबिलिटी की पहचान वैज्ञानिक Alok C. Gupta के प्रमुख शोध क्षेत्र के रूप में की गई है।
इन वस्तुओं से निकलने वाले एक्स-रे विकिरण का अध्ययन शोधकर्ताओं को यह समझने में मदद कर सकता है कि कण कैसे त्वरित होते हैं, विकिरण कैसे बनता है और शक्तिशाली जेट अत्यधिक परिस्थितियों में किस तरह व्यवहार करते हैं। ARIES ने XMM-Newton अवलोकनों का उपयोग करते हुए TeV ब्लेज़ार PG 1553+113 की एक्स-रे स्पेक्ट्रल वेरिएबिलिटी पर 2026 के हालिया शोध की भी जानकारी दी है।
ऐसे अवलोकन सक्रिय आकाशगंगाओं को ऊर्जा देने वाली प्रक्रियाओं के बारे में जानकारी देते हैं और खगोलविदों को अतिद्रव्यमान ब्लैक होल के आसपास पदार्थ तथा विकिरण के व्यवहार को बेहतर ढंग से समझने में मदद करते हैं।
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