सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : नई दिल्ली। देश के कई हिस्सों में डेंगू के मामले बढ़ने के बीच मरीजों और परिवारों में प्लेटलेट्स को लेकर चिंता रहती है। डेंगू संक्रमण के दौरान कुछ मरीजों में प्लेटलेट्स की संख्या कम हो जाती है, लेकिन हर मरीज में ऐसा होना जरूरी नहीं है। विशेषज्ञों के मुताबिक, केवल प्लेटलेट्स कम होने को ही बीमारी की गंभीरता का एकमात्र संकेत नहीं माना जाना चाहिए। डॉक्टरों के अनुसार डेंगू वायरस प्लेटलेट्स पर असर डाल सकता है। इसके साथ शरीर की प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया और अस्थि-मज्जा में प्लेटलेट्स बनने की प्रक्रिया पर अस्थायी असर भी पड़ सकता है। यही कारण है कि बीमारी के दौरान प्लेटलेट्स की संख्या घट सकती है। डेंगू में यह कमी अक्सर बीमारी के शुरुआती दिनों के बाद दिखाई देती है।
प्लेटलेट्स बढ़ाने के लिए कोई ऐसी विशेष दवा नहीं है, जो तुरंत उनकी संख्या बढ़ा दे। संक्रमण से शरीर के उबरने के साथ प्लेटलेट्स सामान्य रूप से फिर बढ़ने लगते हैं। पर्याप्त तरल पदार्थ लेना, आराम करना और चिकित्सकीय निगरानी में रहना महत्वपूर्ण है। पपीते के पत्ते का रस, बकरी का दूध या अन्य घरेलू नुस्खों को प्लेटलेट्स बढ़ाने का प्रमाणित उपचार नहीं माना जाता। हर कम प्लेटलेट वाले मरीज को प्लेटलेट चढ़ाने की जरूरत भी नहीं होती। चिकित्सक प्लेटलेट संख्या के साथ मरीज की पूरी स्थिति, रक्तस्राव और अन्य जांचों को देखकर निर्णय लेते हैं। सक्रिय रक्तस्राव, तेज पेट दर्द, लगातार उल्टी, मसूड़ों या नाक से खून आना जैसे चेतावनी संकेत दिखाई दें तो तुरंत अस्पताल में चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए।
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