सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : चीन के 169 गोल्ड के सामने भारत के 21, आखिर क्यों इतना बड़ा अंतर

नई दिल्ली। एशियन गेम्स 2026 में चीन ने एक बार फिर अपनी खेल ताकत का प्रदर्शन करते हुए 169 स्वर्ण समेत 341 पदक जीते। भारत 21 स्वर्ण, 27 रजत और 37 कांस्य सहित कुल 85 पदकों के साथ चौथे स्थान पर रहा। चीन के मुकाबले भारत के स्वर्ण पदकों की संख्या करीब आठ गुना कम रही। सवाल यह है कि दुनिया के दो सबसे अधिक आबादी वाले देशों में खेलों के स्तर पर इतना बड़ा अंतर क्यों है? इसका जवाब केवल आबादी में नहीं छिपा है। चीन का खेल ढांचा बड़ी संख्या में खेलों और पदक स्पर्धाओं को कवर करता है। एशियन गेम्स में चीन ने भारत की तुलना में अधिक खेलों में हिस्सा लिया और उसके पास खिलाड़ियों का बड़ा प्रतिस्पर्धी आधार है। अधिक खेलों में मजबूत उपस्थिति का सीधा असर पदक तालिका पर पड़ता है।

भारत की एक बड़ी कमजोरी व्यक्तिगत ओलंपिक खेलों की कई स्पर्धाओं में लगातार शीर्ष स्तर का प्रदर्शन बनाए रखने की रही है। इस बार भारत ने तीरंदाजी, मुक्केबाजी और कुश्ती में अच्छा प्रदर्शन किया, लेकिन निशानेबाजी और एथलेटिक्स जैसे पारंपरिक पदक स्रोत उम्मीद के मुताबिक स्वर्ण नहीं दिला सके। इसके बावजूद भारत ने 85 पदक हासिल किए और कुछ खेलों में नई ताकत दिखाई। भारत के लिए सकारात्मक पक्ष यह रहा कि तीरंदाजी में पांच स्वर्ण समेत नौ पदक मिले, जबकि मुक्केबाजी में तीन स्वर्ण और कुश्ती में दो स्वर्ण आए। क्रिकेट, कबड्डी और हॉकी में भी भारत ने पुरुष और महिला दोनों वर्गों में स्वर्ण पदक जीते।

विशेषज्ञों के अनुसार, चीन की बराबरी के लिए भारत को केवल पदकों की संख्या बढ़ाने के बजाय खेलों में व्यापक भागीदारी, जमीनी स्तर पर प्रतिभा खोज, विश्वस्तरीय प्रशिक्षण, बेहतर कोचिंग और व्यक्तिगत स्पर्धाओं में पदक जीतने वाले खिलाड़ियों की संख्या बढ़ानी होगी। 2028 लॉस एंजिल्स ओलंपिक से पहले इन क्षेत्रों पर लगातार काम करना भारत के लिए महत्वपूर्ण होगा।


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