सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : रात में सोते समय हाथ सुन्न होने के कारण जानें, कब सतर्क रहें

रात में सोते समय हाथों का सुन्न हो जाना या उनमें झनझनाहट महसूस होना कई लोगों के लिए आम परेशानी है। अक्सर लोग इसे गलत करवट सोने या हाथ पर दबाव पड़ने का परिणाम मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। कई बार हाथ की स्थिति बदलने पर यह परेशानी ठीक हो जाती है, लेकिन यदि बार-बार ऐसा हो, सुन्नपन लंबे समय तक बना रहे या इसके साथ दर्द और कमजोरी भी महसूस हो, तो इसके पीछे किसी स्वास्थ्य समस्या की संभावना हो सकती है। हाथ सुन्न होने के प्रमुख कारण

1. सोने की गलत स्थिति: सोते समय हाथ को सिर के नीचे दबाकर रखना, कोहनी मोड़कर लंबे समय तक सोना या कलाई पर दबाव पड़ना नसों को प्रभावित कर सकता है। ऐसी स्थिति में हाथ सुन्न हो सकता है। आमतौर पर दबाव हटाने और हाथ की स्थिति बदलने पर आराम मिलने लगता है।

2. कार्पल टनल सिंड्रोम: कलाई में मौजूद एक संकरी जगह से गुजरने वाली मीडियन नर्व पर दबाव पड़ने से यह समस्या होती है। इसमें विशेष रूप से अंगूठे, तर्जनी, मध्यमा और अनामिका के कुछ हिस्से में झनझनाहट या सुन्नपन महसूस हो सकता है। रात में इसके लक्षण बढ़ सकते हैं और नींद भी खुल सकती है।

3. गर्दन की नसों पर दबाव: गर्दन की हड्डियों, डिस्क या आसपास के ऊतकों से नसों पर दबाव पड़ने पर दर्द, झनझनाहट और सुन्नपन गर्दन से हाथ तक फैल सकता है। कुछ लोगों को हाथ में कमजोरी भी महसूस होती है।

4. मधुमेह से जुड़ी नसों की समस्या: लंबे समय तक रक्त शर्करा नियंत्रित न रहने पर नसों को नुकसान पहुंच सकता है। इसे डायबिटिक न्यूरोपैथी कहा जाता है। इसमें हाथों और पैरों में सुन्नपन, जलन या झनझनाहट हो सकती है।

5. विटामिन बी12 की कमी: विटामिन बी12 नसों के सामान्य कामकाज के लिए जरूरी है। इसकी कमी होने पर हाथ-पैरों में झनझनाहट, सुन्नपन, कमजोरी और संतुलन बनाने में परेशानी हो सकती है।

किन लक्षणों को नजरअंदाज न करें? यदि हाथों का सुन्नपन बार-बार होता है, लंबे समय तक बना रहता है, पकड़ कमजोर होने लगती है, चीजें हाथ से गिरने लगती हैं या गर्दन से हाथ तक दर्द फैलता है, तो डॉक्टर से जांच करानी चाहिए। लक्षणों के आधार पर डॉक्टर नसों की जांच, रक्त शर्करा, विटामिन बी12 या अन्य आवश्यक परीक्षण कराने की सलाह दे सकते हैं। महत्वपूर्ण चेतावनी: यदि अचानक एक हाथ सुन्न या कमजोर हो जाए और साथ में चेहरा टेढ़ा होना, बोलने में कठिनाई, देखने में परेशानी या संतुलन बिगड़ने जैसे लक्षण हों, तो यह स्ट्रोक का संकेत हो सकता है। ऐसी स्थिति में तुरंत आपातकालीन चिकित्सा सहायता लें, भले ही लक्षण कुछ समय बाद ठीक हो जाएं।

हाथों को सुन्न होने से बचाने के उपाय सोते समय हाथों को शरीर के नीचे दबाकर रखने से बचें। कलाई को लंबे समय तक बहुत ज्यादा मोड़कर न रखें और सोने की ऐसी स्थिति अपनाएं जिसमें गर्दन तथा हाथों पर अनावश्यक दबाव न पड़े। यदि कलाई में झनझनाहट बार-बार होती है, तो डॉक्टर की सलाह पर रात में कलाई को सीधा रखने वाला स्प्लिंट उपयोगी हो सकता है। हाथों का कभी-कभार सुन्न होना दबाव के कारण हो सकता है, लेकिन लगातार या बार-बार होने वाले लक्षणों का कारण जानना जरूरी है। केवल लक्षणों के आधार पर किसी बीमारी की पुष्टि नहीं की जा सकती। समय पर जांच कराने से उचित उपचार में मदद मिलती है।


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