सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस / आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : उपराष्ट्रपति श्री जगदीप धनखड़ ने सोमवार को कोच्चि स्थित नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ एडवांस्ड लीगल स्टडीज (NUALS) में छात्रों को संबोधित करते हुए न्यायपालिका की गिरती साख पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र के मजबूत स्तंभ के रूप में न्यायपालिका की प्रतिष्ठा सर्वोपरि है और इसे किसी भी प्रकार के आचरण से क्षति नहीं पहुंचनी चाहिए।
धनखड़ ने जोर देकर कहा कि यदि किसी न्यायाधीश द्वारा अपने पद की गरिमा के विपरीत आचरण किया जाता है, तो उसके खिलाफ उचित कार्रवाई आवश्यक है। उन्होंने न्यायपालिका की स्वतंत्रता का समर्थन करते हुए कहा कि यह स्वतंत्रता जवाबदेही के साथ संतुलित होनी चाहिए, तभी आम जनता का भरोसा बना रह सकता है।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि न्यायिक संस्थाओं में पारदर्शिता और विश्वास की बहाली के लिए आवश्यक है कि उनके भीतर अनुशासन और जिम्मेदारी भी सुनिश्चित की जाए। उन्होंने यह भी कहा कि न्यायपालिका की आलोचना को लोकतंत्र का हिस्सा मानते हुए उसकी सीमाओं का भी ध्यान रखा जाना चाहिए।
कार्यक्रम में देशभर से कानून के छात्रों और शिक्षकों ने भाग लिया। उपराष्ट्रपति का यह वक्तव्य ऐसे समय में आया है जब न्यायपालिका की भूमिका और उसके आंतरिक तंत्र पर सार्वजनिक बहसें तेज हो रही हैं। उन्होंने युवाओं से संविधान और कानून की मूल भावना को समझने और न्याय के क्षेत्र में निष्पक्षता के साथ योगदान देने का आग्रह किया।
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