सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस / आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : आपातकाल की 50वीं वर्षगांठ पर देश में एक बार फिर संविधान संशोधन को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने इस अवसर पर एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि भारतीय संविधान की प्रस्तावना को बदला नहीं जा सकता, क्योंकि यह संविधान की आत्मा और मूल उद्देश्य को दर्शाती है।
धनखड़ ने 1976 में लागू किए गए 42वें संविधान संशोधन का उल्लेख किया, जिसके तहत प्रस्तावना में “समाजवादी”, “धर्मनिरपेक्ष” और “राष्ट्रीय अखंडता” जैसे शब्द जोड़े गए थे। यह संशोधन तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के आपातकालीन शासन के दौरान हुआ था।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि दुनिया के किसी भी लोकतांत्रिक देश में संविधान की प्रस्तावना को नहीं बदला गया, लेकिन भारत में ऐसा हुआ है, जो चिंताजनक है। उन्होंने इसे संविधान की आत्मा से छेड़छाड़ करार दिया।
इस मुद्दे पर आरएसएस के दत्तात्रेय होसबाले, केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह और पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी सहमति जताई है। सभी ने प्रस्तावना में किए गए संशोधन पर पुनर्विचार की आवश्यकता बताई है।
वर्तमान में यह मुद्दा न केवल संविधान विशेषज्ञों, बल्कि राजनेताओं और नागरिकों के बीच भी चर्चा का विषय बना हुआ है। आपातकाल के 50 वर्ष बाद भी इसके प्रभाव और निर्णयों पर सवाल उठाए जा रहे हैं।
#उपराष्ट्रपति_जगदीप_धनखड़ #संविधान_की_प्रस्तावना #आपातकाल_1976 #संविधान_संशोधन #राजनीतिक_विवाद