सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : नई दिल्ली। अमेरिका में एच-1बी वीजा को लेकर नए नियमों के बाद भारतीय आईटी पेशेवरों और अमेरिकी कंपनियों के बीच चिंता बढ़ गई है। हालांकि, एच-1बी वीजा को खत्म नहीं किया गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कुछ एच-1बी मामलों पर लागू 1 लाख अमेरिकी डॉलर के भुगतान की शर्त को एक और साल के लिए बढ़ाकर सितंबर 2027 तक कर दिया है।

नए प्रावधान के तहत अमेरिका के बाहर मौजूद ऐसे विदेशी पेशेवरों के लिए, जिनके एच-1बी आवेदन इस प्रतिबंध के दायरे में आते हैं, नियोक्ता को सामान्य प्रक्रिया के अलावा 1 लाख डॉलर का भुगतान करना होगा। हालांकि, राष्ट्रीय हित से जुड़े मामलों में अमेरिकी प्रशासन को इस प्रतिबंध से छूट देने का अधिकार दिया गया है।

इसके साथ ही अमेरिकी प्रशासन ने एच-1बी आवेदनों की जांच और कड़ी करने का फैसला किया है। अधिकारियों को आवेदन पर विचार करते समय यह भी देखने का निर्देश दिया गया है कि संबंधित कंपनी ने हाल में अमेरिकी कर्मचारियों की छंटनी की है या नहीं। सरकार का कहना है कि इससे एच-1बी कार्यक्रम के कथित दुरुपयोग और कम वेतन वाले विदेशी श्रमिकों के जरिए अमेरिकी कर्मचारियों को बदलने की समस्या पर रोक लगाने में मदद मिलेगी।

हालांकि, 1 लाख डॉलर की भुगतान व्यवस्था को लेकर कानूनी लड़ाई भी जारी है। जून 2026 में एक अमेरिकी संघीय अदालत ने इस शुल्क व्यवस्था को रद्द कर दिया था और बाद में अपीलीय अदालत ने भी इसे रोकने की मांग स्वीकार नहीं की। इसलिए मौजूदा स्थिति में शुल्क की वसूली पर न्यायिक प्रक्रिया का असर बना हुआ है।

इसका मतलब यह है कि एच-1बी वीजा बंद नहीं हुआ है, लेकिन नए आवेदकों, खासकर अमेरिका के बाहर से आने वाले पेशेवरों और उन्हें नियुक्त करने वाली कंपनियों के लिए प्रक्रिया अधिक महंगी और जांच-आधारित हो गई है। भारतीय पेशेवरों पर इसका असर महत्वपूर्ण हो सकता है, क्योंकि भारत एच-1बी कार्यक्रम का सबसे बड़ा लाभार्थी समूह है।


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