सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : वॉशिंगटन। अमेरिका ने कम क्षमता वाले परमाणु विस्फोटों का पता लगाने की अपनी क्षमता मजबूत करने के लिए नेवादा राष्ट्रीय सुरक्षा स्थल पर भूमिगत रासायनिक विस्फोट का प्रयोग किया है। अमेरिकी राष्ट्रीय परमाणु सुरक्षा प्रशासन के अनुसार, यह प्रयोग परमाणु परीक्षण नहीं था, बल्कि गैर-परमाणु उच्च-विस्फोटक सामग्री का इस्तेमाल करके किया गया वैज्ञानिक परीक्षण था।
यह प्रयोग नेवादा स्थल के पी टनल में किया गया। वैज्ञानिकों ने विस्फोट से उत्पन्न संकेतों को रिकॉर्ड करने के लिए त्वरणमापी, भूकंपमापी, वायुमंडलीय ध्वनि सेंसर, विद्युतचुंबकीय सेंसर और रेडियोधर्मी संकेतों की निगरानी करने वाले उपकरणों सहित कई तरह के सेंसर लगाए। इससे भूमिगत विस्फोटों से पैदा होने वाले संकेतों का विस्तृत आंकड़ा जुटाया गया।
अमेरिका विशेष रूप से ऐसे ‘डिकपल्ड’ विस्फोटों का पता लगाने की क्षमता सुधारना चाहता है, जिनमें भूमिगत कक्ष के भीतर विस्फोट किया जाता है और भूकंपीय संकेत अपेक्षाकृत कमजोर हो सकते हैं। अमेरिकी अधिकारियों ने इस तकनीक को चीन द्वारा 2020 में कथित भूमिगत परमाणु परीक्षण से भी जोड़ा है। हालांकि, चीन ने उस आरोप को खारिज किया है और अंतरराष्ट्रीय निगरानी संस्था ने उपलब्ध आंकड़ों को उस समय निर्णायक नहीं माना था। अमेरिका के अनुसार, प्रयोग से मिले आंकड़ों का इस्तेमाल वैज्ञानिक मॉडलों और उन गणनात्मक प्रणालियों को बेहतर बनाने में किया जाएगा, जो भूमिगत परमाणु विस्फोटों की पहचान और उनकी प्रकृति का आकलन करती हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी भूकंपीय निगरानी परमाणु विस्फोटों का पता लगाने की प्रमुख तकनीकों में शामिल है।
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