सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क – आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस  /  आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल   /  मुंबई : बॉम्बे हाई कोर्ट ने गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यानी यूएपीए की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया है। मुख्य न्यायाधीश एएस गडकरी और न्यायमूर्ति नीला गोखले की खंडपीठ ने कहा कि यह कानून संविधान के अनुरूप है और इसे राष्ट्रपति की स्वीकृति प्राप्त है, इसलिए इसे असंवैधानिक नहीं कहा जा सकता।

यह याचिका अनिल बाबूराव बैले द्वारा 2021 में दायर की गई थी। बैले एल्गार परिषद मामले में एनआईए की जांच के दायरे में आए थे। उन्होंने अपनी याचिका में यूएपीए के साथ-साथ भारतीय दंड संहिता की धारा 124ए (देशद्रोह) को भी असंवैधानिक घोषित करने की मांग की थी। याचिकाकर्ता का तर्क था कि यूएपीए के प्रावधान सरकार को किसी भी व्यक्ति या संगठन को बिना पर्याप्त स्पष्टता के आतंकवादी या गैरकानूनी घोषित करने का अधिकार देते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यूएपीए में किया गया 2001 का संशोधन सरकार को संयुक्त राष्ट्र के नाम पर भारतीय नागरिकों पर कठोर कार्रवाई की छूट देता है। कोर्ट ने इन दलीलों को खारिज करते हुए कहा कि यह कानून विधिक प्रक्रिया से पारित हुआ है और संविधान की भावना के अनुरूप है।

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