सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस / आईटीडीसी न्यूज़, भोपाल।
वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस से डीजल की आपूर्ति की अनुमति देने के अपने फैसले का बचाव करते हुए कहा है कि यह कदम अमेरिकी जनता के हित में है। उन्होंने यूरोपीय संघ पर भी निशाना साधा और दावा किया कि यूरोप ने रूस से ऊर्जा खरीदने पर 250 अरब डॉलर खर्च किए हैं। ट्रंप ने आरोप लगाया कि अमेरिकी मीडिया यूरोपीय संघ की रूस से ऊर्जा खरीद के मुद्दे को पर्याप्त महत्व नहीं दे रहा है। उनका यह बयान रूस से डीजल आयात को लेकर अमेरिका में उठ रहे विरोध के बीच आया है। रूस से डीजल आपूर्ति को लेकर समझौता ट्रंप ने 9 अक्टूबर 2026 को रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ बातचीत के बाद रूसी डीजल की आपूर्ति बढ़ाने की घोषणा की थी। उनके अनुसार, रूस तत्काल अमेरिकी और वैश्विक बाजारों के लिए तीन लाख टन से अधिक डीजल उपलब्ध कराएगा। इसके बाद नवंबर में पांच लाख टन और आगे दस लाख टन डीजल की आपूर्ति की योजना बताई गई। अमेरिकी प्रशासन ने इस व्यवस्था के तहत रूसी डीजल की खरीद के लिए प्रतिबंधों में अस्थायी राहत भी दी है।
ट्रंप का कहना है कि इस फैसले से ईंधन की बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने और अमेरिकी उपभोक्ताओं को राहत देने में मदद मिल सकती है। अमेरिका में नवंबर में होने वाले मध्यावधि चुनावों से पहले ईंधन की कीमतें एक महत्वपूर्ण राजनीतिक मुद्दा बनी हुई हैं। यूरोपीय संघ पर ट्रंप का आरोप
12 अक्टूबर को सोशल मीडिया पर अपने बयान में ट्रंप ने दावा किया कि यूरोपीय संघ ने रूस से ऊर्जा खरीदने पर 250 अरब डॉलर खर्च किए हैं। उन्होंने अमेरिकी मीडिया पर इस विषय को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया। हालांकि, ट्रंप ने इस राशि की गणना के लिए कोई स्पष्ट समयावधि नहीं बताई। उपलब्ध अनुमानों के अनुसार, यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद रूस से यूरोपीय संघ के जीवाश्म ईंधन आयात पर हुआ कुल खर्च इस आंकड़े के आसपास हो सकता है।
अमेरिका में फैसले का विरोध रूस से डीजल खरीदने के फैसले को लेकर अमेरिकी राजनीति में मतभेद सामने आए हैं। रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक, दोनों दलों के कुछ सांसदों ने इस कदम पर आपत्ति जताई है। आलोचकों का तर्क है कि रूसी ऊर्जा की खरीद से मॉस्को को आर्थिक लाभ मिल सकता है, जिससे यूक्रेन के खिलाफ जारी युद्ध के बीच रूस पर दबाव कम होने की आशंका है।अमेरिकी सांसदों के एक समूह ने प्रशासन से इस फैसले को वापस लेने की मांग की है। उनका कहना है कि रूस पर आर्थिक प्रतिबंध लगाने की नीति के बीच उससे डीजल खरीदने की अनुमति देना अमेरिकी रणनीति के विपरीत हो सकता है। दूसरी ओर, ट्रंप प्रशासन इस कदम को ईंधन की कीमतों पर नियंत्रण पाने और घरेलू हितों की रक्षा करने के प्रयास के रूप में पेश कर रहा है।
ईंधन की कीमतों पर कितना असर पड़ेगा? विशेषज्ञों के अनुसार, रूस से अतिरिक्त डीजल की आपूर्ति से बाजार को कुछ राहत मिल सकती है, लेकिन अमेरिकी मांग की तुलना में इसकी मात्रा सीमित है। इसलिए ईंधन की कीमतों में बड़ी गिरावट की गारंटी नहीं है। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और वैश्विक आपूर्ति में व्यवधान भी तेल बाजार को प्रभावित कर रहे हैं। फिलहाल, ट्रंप का यह फैसला ऊर्जा नीति, रूस के साथ संबंधों और यूक्रेन युद्ध को लेकर अमेरिका की रणनीति पर नई बहस छेड़ रहा है। आने वाले समय में यह स्पष्ट होगा कि रूसी डीजल की अतिरिक्त आपूर्ति से कीमतों पर कितना असर पड़ता है और इसका अमेरिकी राजनीति पर क्या प्रभाव होता है।
Hashtags: #WorldInternational #Bhopal #एनएन #टवर #आईट #गटन #रपत #अपन #करत #टरपब