सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल :  प्रयागराज महाकुंभ 2025 के दौरान श्री कांची कामकोटि पीठ के 70वें पीठाधिपति जगद्गुरु शंकराचार्य विजयेन्द्र सरस्वती ने सनातन धर्म और उसकी रक्षा को लेकर महत्वपूर्ण विचार रखे। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म को सशक्त करने के लिए ‘ट्रिपल पी’ यानी पंडा, पंडित और पुरोहित को मजबूत करना होगा।

सनातन धर्म का संरक्षण क्यों जरूरी?

शंकराचार्य ने कहा कि विश्व शांति के लिए भारत की मजबूती जरूरी है, और भारत की मजबूती के लिए सनातन धर्म का संरक्षण अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म का अर्थ अनादि और अनंत से है, जो कभी समाप्त नहीं होता। यह धर्म द्वेष की जगह करुणा और प्रेम की शिक्षा देता है।

कुम्भ राष्ट्र को दिशा देता है

प्रयागराज महाकुंभ 2025 में जगद्गुरु ने कहा कि हर कुम्भ राष्ट्र को एक नई दिशा प्रदान करता है। राम मंदिर निर्माण हो या सनातन धर्म को शक्ति देने वाली सरकार, कुम्भ से हमेशा नई प्रेरणा मिली है। इस बार कश्मीर से कन्याकुमारी तक मंदिरों को सरकारी नियंत्रण से मुक्त करने की मांग उठी है।

धर्म और सरकार की भूमिका

शंकराचार्य ने कहा कि धर्माचरण के बिना शांति और विकास संभव नहीं। उन्होंने कहा, “धर्म के प्रचार-प्रसार में सरकार की सहायक भूमिका जरूरी है। सरकार का सहयोग मिलेगा, तो मठ-मंदिरों द्वारा समाज कल्याण और मानवता की सेवा को बल मिलेगा।”

सनातन को मजबूत करने के लिए ‘ट्रिपल पी’ मॉडल

शंकराचार्य के अनुसार, सनातन धर्म को गति देने के लिए ‘ट्रिपल पी’ यानी पंडा, पंडित और पुरोहित को मजबूत करना होगा। उन्होंने कहा कि जब यह तीनों वर्ग सशक्त होंगे, तो पंचायतें भी मजबूत होंगी, जिससे धर्म और समाज को संरक्षित किया जा सकेगा।

मंदिरों का प्रबंधन हिन्दुओं के हाथ में हो

उन्होंने कहा कि भारत के सभी मंदिरों को सरकारी नियंत्रण से मुक्त किया जाना चाहिए। मंदिरों के चढ़ावे को धर्म प्रचार, वेद पाठशाला, संस्कृत शिक्षण और गोशालाओं के लिए इस्तेमाल किया जाना चाहिए।

युवा और धर्म

उन्होंने कहा कि आज का युवा धर्म से विमुख नहीं है, बल्कि जब भी सनातन धर्म पर प्रश्न उठते हैं, तो वही सबसे पहले आगे आता है। जरूरत सिर्फ सही मार्गदर्शन की है।

निष्कर्ष

शंकराचार्य ने कहा कि भारत के कल्याण के लिए धर्म का पालन आवश्यक है। महाकुंभ का आयोजन इस बात का प्रमाण है कि सनातन धर्म आज भी जीवंत और प्रासंगिक है। उन्होंने आह्वान किया कि मंदिरों को समुदाय का केंद्र बनाया जाए, संस्कृत को अनिवार्य किया जाए, और सनातन संस्कृति को जीवंत रखने के लिए सभी मिलकर प्रयास करें।

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