सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस / आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने सोमवार को एक महत्वपूर्ण संबोधन में कहा कि वर्तमान समय में जलवायु परिवर्तन और पर्यावरणीय संकट ने दुनिया को ऐसी स्थिति में ला दिया है, जहां “स्थिरता” केवल एक आदर्श वाक्य नहीं, बल्कि एक वास्तविक आवश्यकता बन चुकी है। उन्होंने यह विचार लेखांकन के क्षेत्र से जुड़ी एक राष्ट्रीय संगोष्ठी को संबोधित करते हुए रखे।
राष्ट्रपति ने कहा कि भारत जैसे विकासशील देशों के लिए स्थिरता का लक्ष्य हासिल करना दोहरी चुनौती है – एक ओर हमें आर्थिक विकास को बनाए रखना है, वहीं दूसरी ओर प्रकृति और संसाधनों का संरक्षण भी सुनिश्चित करना है। उन्होंने लेखांकन की भूमिका को इसमें बेहद अहम बताया और कहा कि “सस्टेनेबिलिटी रिपोर्टिंग” और पारदर्शी लेखा प्रणाली कंपनियों को जिम्मेदार बनने की ओर प्रेरित कर सकती हैं।
उन्होंने इस अवसर पर भारत की परंपरागत जीवनशैली की भी सराहना की, जो सादगी, पुनः उपयोग और सामंजस्य पर आधारित रही है। उन्होंने कहा कि आज जब दुनिया पर्यावरणीय संतुलन को लेकर चिंतित है, तब भारत के प्राचीन मूल्य और आधुनिक टेक्नोलॉजी मिलकर वैश्विक स्थिरता में योगदान दे सकते हैं।
राष्ट्रपति मुर्मु के इस बयान को नीति-निर्माताओं, उद्योग जगत और आम जनता के लिए एक स्पष्ट संकेत माना जा रहा है कि पर्यावरणीय संतुलन को बनाए रखना अब टालने योग्य विकल्प नहीं रहा, बल्कि यह एक साझा जिम्मेदारी है।
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