सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : नई दिल्ली। भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायपालिका को लेकर दिए गए बयानों पर सुप्रीम कोर्ट ने शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के सांसद संजय राउत से स्पष्टीकरण मांगा है। 15 अक्टूबर 2026 को हुई सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने कहा कि राउत की याचिका पर फिलहाल अस्थायी रूप से विचार किया जा रहा है और यह उनके आचरण पर स्पष्टीकरण देने की शर्त पर निर्भर करेगा।
न्यायपालिका पर टिप्पणी को लेकर विवाद यह मामला मुख्य न्यायाधीश द्वारा विपक्षी नेताओं के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात नहीं करने के फैसले के बाद शुरू हुए विवाद से जुड़ा है। विपक्षी नेताओं ने निर्वाचन आयोग के कामकाज और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर अपनी चिंताएं रखने के लिए मुलाकात का अनुरोध किया था। मुख्य न्यायाधीश ने उन्हें अपनी बात याचिका के माध्यम से अदालत के सामने रखने का रास्ता सुझाया था।
इसके बाद संजय राउत ने न्यायाधीशों के राजनीतिक कार्यक्रमों में शामिल होने और नेताओं के साथ मेलजोल को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने यह भी दावा किया था कि करीब 80 न्यायाधीश लंदन में राजनीतिक नेताओं के साथ बैडमिंटन खेलते दिखाई दिए थे। इन टिप्पणियों को लेकर न्यायपालिका की गरिमा और तथ्यों की विश्वसनीयता पर विवाद खड़ा हो गया।
अटॉर्नी जनरल ने दी अवमानना कार्यवाही की सहमति भारत के अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने संजय राउत और पत्रकार निखिल वागले के बयानों को लेकर आपराधिक अवमानना की कार्यवाही शुरू करने के लिए सहमति दी है। यह सहमति सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन की याचिका पर दी गई। अटॉर्नी जनरल ने राउत के आरोपों को तथ्यहीन बताया और कहा कि सार्वजनिक रूप से ऐसे आरोप लगाने से पहले तथ्यों की पुष्टि की जानी चाहिए।
बैडमिंटन से जुड़ी तस्वीरों के संबंध में दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए कहा गया कि उन्हें लंदन के कार्यक्रम से जोड़ना सही नहीं था। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, तस्वीरें नवंबर 2025 में नई दिल्ली के त्यागराज स्टेडियम में आयोजित एक कार्यक्रम की थीं।
चुनाव आयोग से जुड़े मामले में भी सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में राहुल गांधी और विपक्षी गठबंधन के अन्य नेताओं की याचिका पर भी सुनवाई हुई। इस याचिका में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण और निर्वाचन आयोग की निर्णय प्रक्रिया से जुड़े कथित अनियमितताओं की जांच की मांग की गई है। अदालत ने निर्वाचन आयोग और संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगा है। संजय राउत इस मामले में याचिकाकर्ताओं में शामिल हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि उनकी याचिका पर विचार फिलहाल उनके स्पष्टीकरण के अधीन है। इस स्तर पर अदालत ने उनके खिलाफ अवमानना के आरोपों पर अंतिम निर्णय नहीं दिया है।
अगली सुनवाई पर रहेगी नजर इस घटनाक्रम ने न्यायपालिका की स्वतंत्रता, सार्वजनिक बयानों की जिम्मेदारी और राजनीतिक आलोचना की सीमाओं को लेकर चर्चा तेज कर दी है। मामले में आगे की कार्रवाई राउत के स्पष्टीकरण और अदालत के आदेशों पर निर्भर करेगी। फिलहाल, अदालत की ओर से मांगा गया जवाब इस प्रकरण का महत्वपूर्ण अगला चरण माना जा रहा है।
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