सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : सुप्रीम कोर्ट ने हाल की एक सुनवाई के दौरान ऑनलाइन उपलब्ध अश्लील और आपत्तिजनक कंटेंट पर चिंता जताई। रिपोर्टों के अनुसार, अदालत ने कहा कि इंटरनेट प्लेटफॉर्म पर “अश्लील सामग्री की जिम्मेदारी किसी को तो लेनी ही होगी”, क्योंकि कई बार ऐसा कंटेंट हटने से पहले लाखों लोग उसे देख चुके होते हैं।
बताया जा रहा है कि अदालत ने सरकार को यह भी सुझाव दिया कि डिजिटल कंटेंट के लिए स्पष्ट और प्रभावी रेगुलेशन आवश्यक हैं, ताकि ऐसे मामलों को समय रहते नियंत्रित किया जा सके। इस कथित टिप्पणी के अनुसार, कोर्ट ने केंद्र सरकार से आगामी चार सप्ताह के भीतर एक ड्राफ्ट नियमन (regulation) प्रस्तुत करने को कहा, जिससे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म, सोशल मीडिया कंपनियों और कंटेंट होस्टिंग साइटों की जिम्मेदारी अधिक पारदर्शी तरीके से तय की जा सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ऐसा कोई रेगुलेशन प्रस्ताव में आता है, तो यह डिजिटल स्पेस में कंटेंट मॉडरेशन, यूज़र सेफ्टी और प्लेटफॉर्म जिम्मेदारियों को एक नई दिशा दे सकता है। हालांकि, इन रिपोर्टों की किसी आधिकारिक प्रेस नोट या सुप्रीम कोर्ट वेबसाइट पर पुष्टि नहीं हुई है, इसलिए फिलहाल इसे अदालत की संभावित टिप्पणी के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है।
कुल मिलाकर, इस मुद्दे ने ऑनलाइन सुरक्षा और कंटेंट रेगुलेशन की आवश्यकता पर राष्ट्रीय स्तर पर नई बहस शुरू कर दी है।
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