सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि कोविड-19 महामारी के दौरान अपनी सेवाएँ देते हुए जान गंवाने वाले डॉक्टरों के परिजन सरकारी बीमा योजना के पूर्ण हकदार हैं, चाहे उन्हें औपचारिक रूप से सरकारी कोविड ड्यूटी पर नियुक्त न किया गया हो। अदालत ने स्पष्ट किया कि महामारी के समय डॉक्टरों ने परिस्थितियों की परवाह किए बिना जनता की सेवा की और ऐसे में तकनीकी आधार पर उन्हें लाभ से वंचित करना अनुचित है।

पीठ ने कहा कि किसी भी प्रकार की चिकित्सा सेवा—चाहे वह निजी अस्पताल में हो, स्वयंसेवी आधार पर या किसी अन्य संस्था के माध्यम से—यदि वह कोविड-19 से संबंधित कार्य से जुड़ी हो, तो डॉक्टर को फ्रंटलाइन वर्कर ही माना जाएगा। इस निर्णय से कई ऐसे डॉक्टर परिवारों को राहत मिलेगी जिन्हें अब तक औपचारिक नियुक्ति न होने के कारण सरकारी बीमा योजना का लाभ नहीं मिला था।

कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकारों को निर्देश दिया कि वे सभी पात्र मामलों की शीघ्र समीक्षा कर लाभ का भुगतान सुनिश्चित करें। यह फैसला महामारी के दौरान स्वास्थ्यकर्मियों के योगदान के प्रति सम्मान और न्याय का एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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