सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) और निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़े कानून को लेकर सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका पर गुरुवार को सुनवाई नहीं हुई। न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता ने याचिकाकर्ता से कहा कि वह मामले को भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) के समक्ष रखें। अदालत ने कहा कि मामलों की सूची और पीठ का गठन मुख्य न्यायाधीश के अधिकार क्षेत्र में आता है।

यह आवेदन 2023 के उस कानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं से जुड़ा है, जिसमें मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति के लिए तीन सदस्यीय चयन समिति का प्रावधान है। इससे पहले 23 सितंबर 2026 को न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने इस कानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं को संविधान पीठ के पास भेजे जाने के सवाल पर अलग-अलग राय दी थी। इसके बाद मामला मुख्य न्यायाधीश के पास भेजा गया था।

ताजा आवेदन में सितंबर के आदेश को वापस लेने की मांग की गई थी। याचिकाकर्ता की ओर से यह तर्क भी रखा गया कि पीठ के एक न्यायाधीश के पुत्र निर्वाचन आयोग की ओर से मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में पेश होते हैं और यह जानकारी सुनवाई के समय उपलब्ध नहीं थी। याचिका में इसी आधार पर आदेश की समीक्षा/वापसी की मांग की गई थी।

न्यायमूर्ति दत्ता ने कहा कि इस तरह के सभी आवेदन और याचिकाएं मुख्य न्यायाधीश द्वारा तय की जाएंगी और मामले को अलग-अलग हिस्सों में नहीं सुना जाएगा। इस तरह अब आगे की प्रक्रिया CJI के समक्ष सूचीबद्ध होने पर निर्भर करेगी।


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