सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क्स / आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस / आईटीडीसी न्यूज़ /एजेंसियाँ/ भोपाल: राष्ट्रीय डेस्क। जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने कहा है कि जनता की आवाज दबाने से किसी भी सरकार को अंततः नुकसान उठाना पड़ सकता है। उन्होंने श्रीलंका, बांग्लादेश और नेपाल में हुए जनविरोध प्रदर्शनों का उदाहरण देते हुए कहा कि इन देशों में विरोध की आवाज को रोकने के प्रयासों के बाद राजनीतिक परिस्थितियां बदल गईं और सत्ता परिवर्तन तक हुआ।

वांगचुक के मुताबिक, लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता की असहमति और विरोध को सुनना सरकारों की जिम्मेदारी है। यदि लोगों की समस्याओं और मांगों को नजरअंदाज किया जाता है, तो असंतोष बढ़ सकता है। उन्होंने संकेत दिया कि शांतिपूर्ण विरोध और संवाद के रास्ते खुले रखना किसी भी लोकतंत्र के लिए जरूरी है।

उन्होंने पड़ोसी देशों की घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि श्रीलंका, बांग्लादेश और नेपाल में जनता के आंदोलनों ने राजनीतिक व्यवस्था पर गहरा असर डाला। इन घटनाओं से यह संदेश मिलता है कि जनभावनाओं की अनदेखी लंबे समय तक नहीं की जा सकती।

वांगचुक की टिप्पणी ऐसे समय में सामने आई है, जब देश में नागरिक अधिकारों, जनआंदोलनों और सरकारों के प्रति असहमति व्यक्त करने के तरीकों को लेकर बहस जारी है। उनका बयान जनता की आवाज सुनने और लोकतांत्रिक संवाद बनाए रखने के महत्व को रेखांकित करता है।


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