सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /  आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल :  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को विज्ञान भवन, नई दिल्ली में श्री नारायण गुरु और महात्मा गांधी के ऐतिहासिक संवाद की शताब्दी समारोह का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने ‘गुरु स्मरण’ कार्यक्रम के तहत दोनों महान विभूतियों की शिक्षाओं को श्रद्धांजलि दी और जनसभा को संबोधित किया।

यह संवाद 12 मार्च 1925 को केरल के वर्कला स्थित शिवगिरी मठ में हुआ था। महात्मा गांधी और श्री नारायण गुरु के बीच यह बातचीत जातिगत भेदभाव, छुआछूत, धर्मांतरण, अहिंसा और दलित उत्थान जैसे विषयों पर केंद्रित थी। यह भारतीय समाज के सामाजिक और नैतिक मूल्यों को मजबूत करने वाला एक ऐतिहासिक क्षण था।

श्री नारायण धर्म संघम ट्रस्ट द्वारा आयोजित इस समारोह में कई आध्यात्मिक और सामाजिक नेता भी उपस्थित रहे। कार्यक्रम में दोनों महान संतों के विचारों और उनके संवाद के ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डाला गया।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “श्री नारायण गुरु और गांधी जी की विचारधारा आज भी उतनी ही प्रासंगिक है। ‘एक जाति, एक धर्म, एक ईश्वर’ का संदेश आज के समय में सामाजिक समरसता का आधार बन सकता है।”

श्री नारायण गुरु (1856–1928) केरल के महान समाज सुधारक और संत थे। उन्होंने जाति प्रथा का विरोध किया और मानवता, समानता और करुणा पर आधारित धर्म की वकालत की। उनके शिवगिरी मठ में गांधी जी की यह ऐतिहासिक भेंट एक सामाजिक चेतना का केंद्र बिंदु बनी थी।

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