क्रिकेट कमेंटेटर और पूर्व खिलाड़ी शिवरामकृष्णन ने BCCI कमेंटेटिंग पैनल छोड़ने का फैसला लिया और पैनल पर रंगभेद के आरोप लगाए। उनके अनुसार, उन्हें कई बार ऐसा महसूस हुआ कि उनके योगदान और सुझावों को गंभीरता से नहीं लिया गया। उन्होंने कहा कि “मक्खन नहीं लगा सकता” जैसी टिप्पणियों के जरिए उन्हें कमतर आंका गया।

शिवरामकृष्णन ने यह भी साझा किया कि पूर्व क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर को ऑस्ट्रेलिया के गेंदबाज शेन वॉर्न की स्पिन गेंदबाजी के खिलाफ प्रैक्टिस कराने का सुझाव उन्होंने ही दिया था, जो टीम के लिए उपयोगी साबित हुआ।

उन्होंने बताया कि पैनल में उनके अनुभव और क्रिकेटिंग दृष्टिकोण को अनदेखा किया गया, जिससे वे असंतुष्ट रहे। इस विवाद ने भारतीय क्रिकेट में कमेंटेटर पैनल्स की पारदर्शिता और विविधता पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के आरोप केवल व्यक्तिगत मुद्दों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इससे क्रिकेट कमेंट्री और प्रशासन में समान अवसर और सम्मान सुनिश्चित करने की आवश्यकता उजागर होती है।

कुल मिलाकर, शिवरामकृष्णन का यह कदम और उनके आरोप भारतीय क्रिकेट कमेंटेटर पैनल में सुधार और समावेशिता की चर्चा को बढ़ावा देने वाली घटना के रूप में देखा जा रहा है।

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